प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि श्री केदारनाथ के निकटवर्ती स्थानों को भी आध्यात्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना होगा। वासुकीताल, गरुड़ चट्टी, लिंचोली और उनके आस-पास श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक दृष्टि से क्या किया जा सकता है, इसका पूरा प्लान तैयार किया जाए। उन्होंने बदरीनाथ के आसपास के क्षेत्रों को मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए भी योजनाएं बनाने को कहा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बदरीनाथ के साथ ही आस-पास के क्षेत्रों को मॉडल के रूप में विकसित करने की भी योजना बनाई जाए। माणा गांव एवं उसके आसपास के क्षेत्रों को रूरल टूरिज्म के लिए विकसित करने की दिशा में भी ध्यान दिया जाए। इनमें स्थानीय कल्चर एवं स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर ईकोनॉमी का अच्छा मॉडल बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि केदारनाथ एवं बद्रीनाथ में श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत सेवकों एवं डॉक्टरों से भी अधिक से अधिक सहयोग लिया जाए। सरकारी व्यवस्थाओं के साथ जन सहयोग भी जरूरी है।
संस्कृति मंत्रालय ने केदारनाथ में आध्यात्मिक पर्यटन स्थल विकसित करने के लिए योजना बनाई है। बैठक में सचिव संस्कृति, गोविंद मोहन ने इसका एक प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि केदारनाथ के लिए संस्कृति मंत्रालय चार प्रकार के कार्य जल्द शुरू करेगा।
सोनप्रयाग में ओरिएंटेशन सेंटर की स्थापना, रामबाड़ा, छोटी लिंचोली, बड़ी लिंचोली एवं चन्नी कैंप में चिन्तन स्थल (ध्यान स्थल), केदारनाथ में शिव उद्यान एवं केदारनाथ में श्री केदार गाथा म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा। इन सभी कार्यों की पूरी योजना बनाकर तैयारी कर ली गई है।