व्यासी जल विद्युत परियोजना : 1777 करोड़ की 120 मेगावाट की यह जलविद्युत परियोजना तैयार है। 86 मीटर ऊंचे बांध वाली इस परियोजना से हर साल 353 मिलियन यूनिट अतिरिक्त हरित ऊर्जा का उत्पादन भी होगा। इससे बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
ऑल वेदर रोड, देवप्रयाग से श्रीकोट : 257 करोड़ की लागत से ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट के तहत देवप्रयाग से श्रीकोट तक 38 किलोमीटर सड़क चौड़ी करने का काम पूरा हो चुका है। इसके निर्माण से देवप्रयाग, बागबान, लक्ष्मोली, जुयालगढ़, कीर्तिनगर और स्वीत गांवों की संयोजकता सुगम होगी।
ऑल वेदर रोड, ब्रहम्पुरी से कौड़ियाला : 248 करोड़ की लागत से 33 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण और डक्ट निर्माण के काम तेजी से चल रहे हैं। ब्रहम्पुरी से कौड़ियाला महादेव चट्टी तक दो लेन में चौड़ीकरण हो चुका है। 600 मीटर मैरीन ड्राईव का निर्माण भी हो चुका है। पर्यटकों के लिए सफर सुलभ होगा।
ऑल वेदर रोड, लामबगड़ : लामबगड़ में कई साल से क्रोनिक लैंड स्लाइड जोन सक्रिय होने से बदरीनाथ धाम जाने वाले यात्रियों और आसपास के लोगों को लगातार परेशानी हो रही थी। लिहाजा, 108 करोड़ की लागत से स्थायी उपचार किया गया है। 500 मीटर की लंबाई में 27 से 44 मीटर ऊंचाई की रीनफोर्स अर्थवॉल और पत्थर से बचाव के लिए रॉकफॉल बैरियर बनाया गया है। भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा में स्थित होने के कारण यह लाभकारी है।
ऑल वेदर रोड, साकणीधार, देवप्रयाग और श्रीनगर : करीब 75 करोड़ 90 लाख रुपये की कीमत से इन सभी जगहों पर स्थायी भूस्खलन वाले क्षेत्रों का उपचार किया गया है। साकणीधार में 200 मीटर, देवप्रयाग में 200 मीटर और श्रीनगर में 700 मीटर मार्ग का उपचार किया गया है।
हिमालयन कल्चरल सेंटर देहरादून : 67 करोड़ की लागत से गढ़ीकैंट में हिमालयन कल्चरल सेंटर स्थापित किया गया है। इसे तहत एक राज्य स्तरीय संग्रहालय, बाह्य एवं आंतरिक कला दीर्घाएं, 800 सीट क्षमता का ऑडिटोरियम, लाइब्रेरी, नाट्यशाला और कांफ्रेंस हॉल का निर्माण किया गया है। इसमें प्रदेश की सभी सांस्कृतिक गतिविधियों, रंगमंच, आर्ट गैलरी, क्राफ्ट प्रदर्शनी को संजोकर रखा जाएगा।
सगंध पौधा केंद्र सेलाकुई : सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र को केंद्र सरकार ने और मजबूती प्रदान की है। यहां 40 करोड़ की लागत से 20 हजार 560 वर्गफिट क्षेत्र में छह अत्याधुनिक इत्र और सुगंध प्रयोगशालाओं का निर्माण किया गया है। इससे सगंध क्षेत्र से जुड़े रिसर्च, कृषि प्रसार, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, मूल्य संवर्धन आदि की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।