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पीएम मोदी का पूरा फोकस पूर्व सैनिक, सैनिक परिवारों का दिल जीतने पर

Mon, 13 Feb 2017 12:04 PM IST
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, पिथौरागढ़
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pm modi
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मौसम की तरह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण भी एकदम साफ रहा। पहली बार पिथौरागढ़ पहुंचे पीएम ने उत्तराखंड में अपनी ही आखिरी चुनावी सभा में साफ संकेत दिया कि पूर्व सैनिकों और सैनिक परिवारों का दिल जीत लिया तो माना जाएं कि चुनाव जीत लिया।
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प्रदेश के एक लाख से अधिक सैन्य परिवारों के लिए मोदी ने वन रैंक, वन पेंशन पर छाए कुहासे को छांटा, उनके लिए कल्याणकारी योजनाएं गिनाई, सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों का गणित भी समझाया। बाकी बची कसर पीएम ने मुख्यमंत्री हरीश रावत के धारचूला सीट को छोड़ने और प्रदेश सरकार के विकास के विजन को चुनौती देकर पूरी की।

मोदी का ही आकर्षण रहा कि पिथौरागढ़ का करीब 30 हजार की क्षमता वाला खेल स्टेडियम खचाखच भर गया। आसपास के मकानों की छतों पर खड़े होकर भी लोगों ने मोदी को देखा और सुना। इस भीड़ से मोदी खुद भी अभिभूत हुए और कहा कि छह मंजिला सभा उन्होंने इससे पहले कभी नहीं देखी। इतना होने पर भी मोदी शायद मन बनाकर आए थे।
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पूर्व सैनिकों और सैनिक परिवारों की जिले में खासी संख्या का आंकड़ा उन्हें इतना भाया कि उज्ज्वला योजना के तहत बांटे जा रहे गैस कनेक्शन की योजना को भी उन्होंने पूर्व सैनिकों से ही जोड़ा। इस पर बोले कि सैनिकों की माताओं को चूल्हे में खाना पकाना पड़ता है और वे एक बार में चार हजार सिगरेट का धुआं लेने को मजबूर होती हैं। इसलिए केंद्र सरकार मुफ्त में गैस कनेक्शन दे रही है।

इतना ही नहीं उन्होंने वन रैंक, वन पेंशन को पूरी तरह से लागू करने का आश्वासन दिया। कहा, सेना के प्रति प्यार हो तब ही सरकार इस तरह के फैसले करती है। इसके बाद लंबी फेहरिस्त उन कामों की रही जो सेना के लिए केंद्र ने किए हैं। पहाड़ की जवानी और पहाड़ के पानी की बात करते हुए मोदी पलायन की समस्या तक आए और इसको मुख्यमंत्री हरीश रावत के धारचूला सीट को छोड़ने पर पहुंचाकर ट्रैक बदल गए।

सरकारी नौकरियों में भ्रष्ट्राचार की जड़ इंटरव्यू को बताया और कहा कि वर्ग तीन और चार में केंद्र सरकार ने इंटरव्यू खत्म किया पर उत्तराखंड सरकार ने नहीं किया। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के विकास के लिए पांच शक्तियों को गिनाया, पंचेश्वर बांध का मुद्दा उठाया, लेकिन इन मामलों में कोई स्पष्ट बात नहीं की।

पीएम ने सर्जिकल स्ट्राइक का मुद्दा उठाते हुए कह भी दिया कि मोदी पर जितने सवाल उठाने हैं, उठाओ, पर सेना पर शक न करो। पीएम ने लगे हाथों यह भी साफ कर दिया कि केंद्र पैसे देने को तैयार है पर प्रदेश सरकार जरूरी औपचारिकताएं तक नहीं निभा पा रही है। प्रधानमंत्री की जनसभा के लिए मौसम भी मेहरबान रहा। पूरी तरह से धूप खिली रही।

भाई, बैणियो, आमा, बूबू पैलाग
म्यर पिथौरागढ़ में आइनाक भाई, बैणियो, आमा, बूबू, नानतिनो नमस्कार, पैलाग अर्थात् मेरे पिथौरागढ़ में आए भाई, बहनों, दादा, दीदी और बच्चों नमस्कार, प्रणाम। यह शब्द किसी और के नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी के हैं। पीएम ने लोगों की नब्ज पकड़ते हुए भाषण ठेठ सोरयाली (पिथौरागढ़) बोली से शुरू किया। प्रधानमंत्री ने पिथौरागढ़ जिले के देवी, देवताओं का अभिनंदन कर लोगों के दिलों को छूने की कोशिश की। पिथौरागढ़ को उत्तराखंड का कश्मीर कहकर सोरघाटी की सुंदरता का बखान करने से भी पीएम मोदी नहीं चूके।

प्रधानमंत्री ने जिस उद्देश्य से कुमाऊंनी भाषा का प्रयोग किया, निशाने पर सटीक लगा। जैसे ही लोगों ने प्रधानमंत्री के मुंह से कुमाऊंनी वह भी पिथौरागढ़ की स्थानीय बोलचाल की भाषा में शब्द सुने तो भीड़ मोदी-मोदी कहने लगी। प्रधानमंत्री इतने में ही नहीं रुके, उन्होंने पहाड़ को मां पूर्णागिरि, गोलज्यू, हाट कालिका, कोटगाड़ी देवी की पावन धरती कहकर संबोधित किया। देवभूमि शब्द तो उनके भाषणों में कई बार सुनाई दिए। पिथौरागढ़ को उत्तराखंड का कश्मीर कहकर प्रधानमंत्री ने सुंदर सोर की तारीफ की। प्रधानमंत्री का कुमाऊंनी, वह भी ठेठ पिथौरागढ़ की बोली के प्रयोग की चर्चा रैली से वापस लौटते समय भी लोग करते दिखे।
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