विधानसभा चुनाव के दौरान कई सीटों पर स्थानीय और बाहरी का मुद्दा गर्म है। कोटद्वार विधानसभा सीट से लेकर चौबट्टाखाल और देवप्रयाग तक हर सीट पर खड़े उम्मीदवार एक-दूसरे को घेरने के लिए बाहरी का मुद्दा उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर उनका इतना जोर है कि चुनाव से असल सवाल नदारद हैं।
पलटवार के लिए मुख्यमंत्री को भाजपा लपेट रही है, जो किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। ये सवाल जब सीएम के समक्ष उठा है तो वह कहते हैं ‘यदि हरीश रावत कहीं से भी बाहरी है तो मेरी 54 साल की राजनीति शून्य है।’ उनकी निगाहों में कांग्रेस के लिए बाहरी कोई मुद्दा नहीं है। ‘अमर उजाला’ ने सीएम से कई अन्य मुद्दों पर बातचीत की। पेश है बातचीत के कुछ प्रमुख अंश:-
चुनाव में कई सीटों पर प्रत्याशी बाहरी का मुद्दा उठा रहे हैं?
उत्त्तराखंड छोटा राज्य है। वहां ऐसे मुद्दों के लिए कोई जगह नहीं है। कांग्रेस के लिए ये कोई मुद्दा नहीं है। जहां तक मेरा सवाल है तो जब में हरिद्वार से लड़ने आया तब भी लोगों ने मुझे बाहरी साबित करने की कोशिश की थी। यदि हरीश रावत कहीं भी बाहरी है तो मेरी 54 साल की राजनीति शून्य है।
चुनाव में अब कांग्रेस को कहां आंकते हैं?
मैंने जनता का इतना समर्थन नहीं देखा। संसाधनों की कमी के बावजूद हम सरकार बनाएंगे। हरिद्वार में मोदी जी को जितने लोग सुनने आए थे, उससे ज्यादा तो कमजोर इलाकों में हमारी सभाओं में लोग जुट रहे हैं।
चुनाव प्रचार में कांग्रेसजन संसाधनों के अभाव का रोना रो रहे हैं ?
यदि हमारे पास संसाधन होते तो 60 से ज्यादा सीटें जीत रहे होते। मुझे नहीं लगता कि संसाधनों की कमी चुनाव परिणाम बहुत ज्यादा प्रभावित करेगी। मैं तो चुनावी सभाओं में कह रहा हूं कि ‘एक तू ही धनवान मोदी, बाकी सब कंगाल’।
लेकिन भाजपा तो केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार के फायदे गिना रही है?
जनता उलटा पूछ रही है कि 2019 में सत्ता से विदा हो गए तब क्या होगा? इस बात की पूरी संभावना है। संघीय व्यवस्था में राज्य भी अपने तरीके से उन्नति कर सकता है। लोगों ने ऐसा होते देखा है।
भाजपा कह रही है हम पांडव हैं, कांग्रेस कह रही है हम पांडव हैं, जब सभी पांडव हैं तो फिर ये महाभारत क्यों?
भाजपा ने जिस तरीके से देश-दुनिया के महारथियों की जुटाया, ऐसा कौरवों ने किया था। ऐसा करके भाजपा ने एक तरह से अपने को कौरव पक्ष साबित किया। गांडीव उठाए कांग्रेसजन पांडव हैं और जनता हमारी सारथी कृष्ण है।
कांग्रेस के घोषणापत्र से भ्रष्टाचार का मुद्दा क्यों गायब हो गया?
हमने सेवा का अधिकार आयोग, सूचना आयोग और लोकायुक्त बनाया। लोकायुक्त पर राज्यपाल अनुमति नहीं दे रहे, उसमें हम क्या कर सकते हैं। मैं पहला सीएम हूं जिसने विभागों के सबसे ज्यादा ढांचे स्वीकृत कराए। वरना अब तक तो लोगों ने तदर्थ में सरकार चलाई।
घोषणापत्र के किन मुद्दों को पूरा करने की आपकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी?
सबसे पहले युवाओं के रोजगार के मुद्दे को प्राथमिकता दूंगा। दूसरी प्राथमिकता महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण है। तीसरे स्थान पर पूर्व सैनिकों के लिए अलग मंत्रालय का गठन करूंगा। ये सब पहले तीन महीने में किया जाएगा।