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देहरादून से दिल्ली तक ‘चहचहाई’ गौरैया

Tue, 16 Jun 2015 01:41 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
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देहरादून जिले में डोईवाला के पास स्थित दूधली गांव के अजय कुमार ने अपने घर से गौरैया के संरक्षण की पहल की और इसका असर दिल्ली-राजस्थान में भी देखने को मिल रहा है।
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अजय के घर में लगे घोंसले देखकर दिल्ली और राजस्थान में उनके कई रिश्तेदारों ने घर में घोंसले लगा दिए हैं। अजय की पहल से आज दर्जनों रिश्तेदारों के यहां गौरैया की चहचहाहट सुनाई दे रही है। अमर उजाला की ओर से गौरैया के संरक्षण को लेकर चलाई जा रही मुहिम से जुड़े अजय कुमार ने बताया कि उनके घर में गौरैया कई बार बच्चे दे चुकी है।

देहरादून के राजीवनगर, निरंजनपुर सब्जी मंडी के पास रहने वाले वाहिद खान भी गौरैया और अन्य पक्षियों के संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। बताया कि उनके यहां 50-60 गौरैया का झुंड रोज आता है। हालांकि पिछले कुछ सालों की तुलना में गौरैया की घटती संख्या की चिंता उन्हें सता रही है।
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बताया कि पहले वह महीने में 35-40 किलोग्राम दाना पक्षियों को खिलाते थे, लेकिन अब 15-20 किलोग्राम दाना लगता है। हरिद्वार निवासी संदीप कुमार ने बताया कि अमर उजाला की मुहिम के बाद उन्होंने दोस्तों के बीच गौरैया के घटने की जानकारी साझा की है। अब वे भी इस दिशा में काम करने लगे हैं।

अपने लिए बनाऊंगी घर, तो गौरैया के लिए भी
रायपुर, देहरादून से ममता मालगुड़ी ने अमर उजाला को फोन कर बताया कि उन्हें इससे पहले यह जानकारी नहीं थी कि गौरैया इतनी तेजी से घट रही है। अमर उजाला की मुहिम से उन्हें यह पता चला। अब अपना घर बनाने जा रहे हैं। इसमें गौरैया के लिए स्पेस जरूर छोड़ेंगे। जब हम अपने के लिए बड़ा घर बना सकते हैं तो उसमें गौरैया के लिए थोड़ी सी जगह क्यों नहीं छोड़ सकते।

घर से करें शुरूआत...
अमर उजाला को फोन, ईमेल और मैसेज कर सुधी पाठकों की ओर से एक सवाल पूछा जा रहा है कि हम भी गौरैया संरक्षण की दिशा में काम करना चाहते हैं। हमें क्या करना चाहिए। इसका जवाब है कि हमें अपने घर से शुरुआत करनी है। सबसे पहले गौरैया को रहने लायक ऐसा घर देना है जहां पर वह सुरक्षित महसूस कर सके। नया घर बना रहे हैं तो गौरैया के लिए जगह छोड़ सकते हैं। पुराने घर में रह रहे हैं तो लकड़ी का घोंसला लगाया जा सकता है।

पक्षी विविधता प्रयोगशाला पहुंच रहे लोग
गुरुकुल कांगड़ी विवि की पक्षी विविधता एवं पक्षी संवाद प्रयोगशाला में लोग गौरैया और घोंसलों के बारे में जानकारी लेने पहुंच रहे हैं। यहां पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति के पक्षी वैज्ञानिक प्रो. दिनेश भट्ट की ओर से उन्हें जानकारी दी जा रही है। शनिवार को यहां से तीन लोग घोंसले लेकर गए और उन्हें लगाने के बारे में भी जानकारी ली।

गौरैया के लिए दीवार में करवाए छेद
गढ़वाल मंडल विकास निगम के सहायक महाप्रबंधक (पर्यटन) जेपी खंडूड़ी ने गिरधर विहार स्थित अपने घर के निर्माणाधीन कमरे का काम एक माह से रोक रखा है, ताकि गौरैया और उसके बच्चों को तकलीफ न हो। तीन साल से गौरैया संरक्षण में लगे जेपी खंडूड़ी ने शुरुआत में घर में बाहर से घडे़ लाकर उन्हें प्राकृतिक घोंसलों का आकार देने की कोशिश की।

लेकिन बात बनती न देख उन्होंने निर्माणधीन कमरे की दीवार में ही चार बडे़ छेद करा दिए। इनमें से दो में गौरैया ने घोंसले बना लिए हैं। उन्होंने तीन अन्य बॉक्स भी बनवाए। खंडूड़ी की इस मुहिम को देख कारपेंटर संजय मौर्या ने एक बॉक्स मुफ्त में बना दिया।

यहां पर करें संपर्क
गौरैया और घोंसले के बारे में कोई जानकारी चाहते हैं आप पक्षी वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सेठी से फोन पर संपर्क कर सकते हैं। आप किसी भी कार्यदिवस में गुरुकुल कांगड़ी विवि की पक्षी विविधता एवं पक्षी संवाद प्रयोगशाला से जानकारी हासिल कर सकते हैं।
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मोबाइल नंबर- 9719775831 (शाम 5-7 बजे तक)
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