मासूम चेहरा, आंखों में शरारत, दोस्तों के साथ मस्ती और फिर खिलखिलाहट...। कुछ ऐसा ही है कबीर और आर्येश का अंदाज।
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पहली नजर में खिलाड़ी नजर न आने वाले दोनों जब बैडमिंटन कोर्ट पर उतरते हैं तो उनकी तेजी अच्छे-अच्छों को मात दे देती है।
बुधवार को समाप्त हुई जिला स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में दोनों ने खिताबों का अंबार लगाकर जलवा बिखेरा। दोनों नन्हे शटलरों का लक्ष्य देश में टॉप रैंक हासिल करना है।
11 साल के आर्येश का कमाल
वसंत विहार निवासी शीशपाल सिंह चौहान के पुत्र आर्येश चौहान 11 साल के हैं। इस साल सातवीं कक्षा में पढ़ाई करने पहुंचे हैं।
बुधवार को खेले चार फाइनल मुकाबलों में आर्येश ने तीन गोल्ड और एक सिल्वर अपने नाम किया। इससे पहले 2013 में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में आर्येश अंडर-13 डबल्स में रजत जीत चुके हैं।
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आर्येश की इसी प्रतिभा को देखकर इनके स्कूल दून प्रेसीडेंसी स्कूल ने फीस माफ कर दी है। आर्येश ने बताया कि उन्होंने चार साल पहले खेलना शुरू किया था। शुरू में परेशानी हुई थी मगर कोच दीपक रावत ने डर दूर किया और खेल भी सिखाया।
अभी तक वे नौ गोल्ड और चार सिल्वर जीत चुके हैं और अब उनका लक्ष्य अंडर-13 में देश में पहली रैंक हासिल करना है।
आठ साल के कबीर का धमाल
महज आठ साल के मासूम से चेहरे वाले कबीर रिवरडेल स्कूल बलबीर रोड में चौथी कक्षा के छात्र हैं। मगर अपने खेल के दम पर वे अभी तक 6 गोल्ड और एक सिल्वर अपने नाम कर चुके हैं।
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बुधवार को जिलास्तरीय टूर्नामेंट में भी कबीर ने 2 गोल्ड पर कब्जा किया। कबीर ने बताया कि पुलिस लाइन में बड़ों को देखकर पहली बार खेलना शुरू किया था, जिसके बाद तीन साल पहले कोच दीपक रावत के पास आया था।
बीते साल राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अंडर-10 डबल्स का सिल्वर जीता था। कबीर का पहला लक्ष्य अंडर-13 की पहली रैंक हासिल करना है, जिसके लिए वे हर रोज दो-तीन घंटे अभ्यास कर रहे हैं।