ईको ग्रीन इंडस्ट्री के निदेशक अमित जैन का कहना है कि पहले काशीपुर में पेपर का काम करते थे। प्लास्टिक बैग का विकल्प के लिए उन्होंने जर्मनी में कंपोस्टेबल बायोडिग्रेडेबल बैग बनाने का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उत्तराखंड में पहली बार इस बैग को तैयार किया है। यह बैग पर्यावरण संरक्षण के मानकों पर खरा पाया गया है। बैग बेकार होने पर प्राकृतिक रूप से धुल कर उसकी खाद बन जाती है। जिसका इस्तेमाल घर के गार्डन या अन्य फसलों में इस्तेमाल कर सकते हैं।
बैग की कीमत 375 रुपये प्रति किलो
अलग-अलग साइज के कंपोस्टेबल बायोडिग्रेडेबल बैग की कीमत 375 रुपये प्रति किलो है। वर्तमान बैग पर 18 प्रतिशत जीएसटी लग रहा है। कंपनी ने केंद्र सरकार के समक्ष में बैग पर जीएसटी घटा कर पांच प्रतिशत करने की मांग उठाई है। इससे बैग की कीमत कम होगी और लोग इसका इस्तेमाल ज्यादा करेंगे।
नॉन बोवन बैग में प्लास्टिक
बाजार में नॉन बोवन बैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसे सामान्य भाषा में कपड़े का बैग कहा जाता है। केंद्र सरकार ने नॉन बोवन बैग पर प्रतिबंध लगाया है।
सरकार ने भी बैग को सराहा
स्टार्ट अप कंपनी ने शहरी विकास सचिव शैलेष बगोली और नगर निगम देहरादून के समक्ष इस बैग का प्रस्तुतीकरण दिया है। बैग की खूबी को देखते हुए सरकार ने इसे सराहा है।