कुछ ही देर में यह अफवाह पूरे प्रेमनगर क्षेत्र में फैल गई। केहरी गांव निवासी सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर तीरथ सिंह रावत ने भी अंडों के नकली होने की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि पकाने के बाद अंडों से किसी तरह की खुश्बू नहीं आ रही है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी योगेंद्र पांडे ने नकली अंडों की आशंका से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर लंबे समय तक स्टोर किए गए अंडों में तापमान बढ़ने पर यह दिक्कत होती है।
तापमान बढ़ने से अंडे के अंदर जर्दी वाला पीला हिस्सा ठोस होने लगता है। साथ ही छिलके के अंदर की तरफ एक झिल्ली जैसी बन जाती है, जो देखने में पॉलीथिन जैसी लगती है। हालांकि उन्होंने कहा कि देर शाम तक ऐसा कोई अंडा उन्हें नहीं मिला है।
नकली अंडों को लेकर समय-समय पर अफवाहें जरूर फैलती हैं लेकिन इनको बनाना असंभव है। खुद फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) कुछ समय पहले लोगों को भ्रम से बचाने के लिए गाइडलाइन जारी कर चुका है।
एफएसएसएआई के अनुसार प्लास्टिक से अंडों का निर्माण नहीं किया जा सकता। अभी तक ऐसी कोई तकनीक विकसित नहीं हुई है, जिससे प्लास्टिक के मिलते-जुलते या नकली अंडे बनाए जा सकें। अंडों के स्टोरेज में गड़बड़ी होने पर उनकी गुणवत्ता और रंग-रूप प्रभावित हो सकता है।
वैसे भी अंडे को अगर एक दिन भी रूम टेंपरेचर में रखा जाए तो उनके खराब होने की आशंका रहती है। ऐसे अंडे कुछ हद तक देखने में प्लास्टिक जैसे हो सकते हैं। गाइडलाइन के अनुसार अंडों को ठंडे वातावरण में स्टोर किया जाना चाहिए।
एफएसएसएआई के अनुसार थ्रीडी प्रिंटिंग से अंडा बनाया जा सकता है। लेकिन इसकी लागत बहुत ज्यादा होगी। ऐसा एक अंडा पांच हजार से अधिक कीमत का होगा। लेकिन बाजार में सामान्य तौर पर बिकने वाले पांच से छह रुपये के अंडे नहीं बनाए जा सकते।
ऐसे करें फ्रेश अंडों की पहचान
अंडों की ताजगी जांचने का बेहद आसान तरीका है। गिलास या मग में पानी भरकर अंडा डालें। अगर अंडा नीचे बैठ जाए तो समझिये वह ताजा है। थोड़ा पुराना होगा तो पानी में नीचे सीधा खड़ा हो जाएगा। ज्यादा पुराना अंडा ऊपर आकर तैरने लगता है।