नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश इस मामले में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक इंदिरा कैंप इस मामले को लेकर खास दबाव में नहीं है। कैंप का मानना है कि धामी के नाम को बदलने का मामला एआईसीसी के स्तर पर हुआ है। विधायक अगर दिल्ली जाते हैं तो हरीश धामी के नाम के बहाने इंदिरा और प्रीतम भी दिल्ली की ओर रुख करेंगे।
विधायकों की अनदेखी हो रही है: माहरा
विधायक दल के उपनेता करण माहरा का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष को हरीश शब्द से पता नहीं क्या चिढ़ है? पहले हरीश रावत और अब हरीश धामी। प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह कह चुके हैं कि पीसीसी की सूची में हरीश धामी को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया था।
फिर कैसे वे प्रदेश सचिव बना दिए? दो बार के विधायक के साथ ऐसा करना सही नहीं है। अगर यह हो भी गया था तो सूची जारी होने से पहले एक बार भी नाम नहीं देखा गया। हाईकमान से इस बात की शिकायत की जाएगी कि विधायकों से कोई राय नहीं ली जा रही है। सात विधायक शिकायत करेंगे।