अब सरकार ने नर्सरी एक्ट बना कर किसानों के हितों को सुरक्षित किया है। किसान जिस नर्सरी से पौधे खरीदेंगे। संचालकों को उसकी उन्नत किस्म व गुणवत्ता की गारंटी देनी होगी। इसके बावजूद भी खरीदे गए पौधों पर फल नहीं लगते हैं तो संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान एक्ट में किया गया है।
हर साल संचालकों को नर्सरी का नवीनीकरण करना होगा। इसके साथ ही पौधों के आयात-निर्यात, नई खोज का पेटेंट, उत्पादन, प्रबंधन समेत तमाम जानकारी का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। एक्ट का पालन न करने पर लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।
बाहरी राज्यों से आने वाले पौधों की भी होगी जांच
बाहरी राज्यों से आपूर्ति होने वाले फलदार पौधे की गुणवत्ता परखने और जांच के लिए एक्ट में प्रावधान नहीं है। प्रदेश की सरकारी और प्राइवेट नर्सरी में तैयार होने वाले पौध के लिए एक्ट में कड़े नियम बनाए गए हैं। सरकार ने उद्यान विभाग को बाहरी राज्यों से आयातित पौधों की गुणवत्ता को लेकर एक्ट प्रावधान करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश में संचालित हैं 243 नर्सरियां
प्रदेश में वर्तमान में सरकारी क्षेत्र की 93 व निजी क्षेत्र की 150 से अधिक नर्सरियां है। जहां से किसान हर साल विभिन्न प्रकार के फलदार पौधे खरीदते हैं। राज्य में सबसे ज्यादा सेब, अखरोट, खुमानी, आड़ू, नाशपाती, अमरूद, अनार की सबसे ज्यादा है। सर्दियों के मौसम में सेब के पौधे लगाए जाते हैं।