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नेपाल में आए भूकंप से हुआ ये खतरनाक नुकसान

Wed, 29 Apr 2015 04:09 PM IST
प्रवेश कुमारी/ अमर उजाला, देहरादून
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नेपाल में आए भूकंप का प्लेन रेप्चर (जहां चट्टानें टूट रही होती हैं) 120 किलोमीटर सामने आया है। विशेषज्ञों की मानें तो इसकी चौड़ाई 50 किलोमीटर है।
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रिवर्स फॉल्ट की वजह से जमीन के भीतर 3 मीटर का भ्रंश (भूमि का उठान) हुआ है। अब तक आए बड़े भूकंपों में यह सबसे कम गहराई वाला इवेंट था। इसकी गहराई 12 किलोमीटर थी, जबकि अन्य बड़े भूकंप अमूमन 25 किलोमीटर से अधिक वाले रहे हैं। गहराई कम रहने की वजह से ही काठमांडू में जान-माल का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।

भूकंपों की दृष्टि से पूरी हिमालयन बेल्ट संवेदनशील है। नेपाल में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.9 आंकी गई। इससे भी अधिक तीव्रता के भूकंप की इस बेल्ट में भविष्य में आने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। ताजे भूकंप का केंद्र काठमांडू से लगभग 80 किलोमीटर दूर लामगंज में था।
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हिमालयन बेल्ट में जमीन के भीतर जबरदस्त ऊर्जा सिंचित हो रही है, लेकिन कहां अभी तक इसका पता नहीं लगाया जा सका है। जिन स्थानों पर भूकंप आए हैं, वहां तो प्री-कर्सर लगाए जा सकते हैं, लेकिन जहां अभी हलचल जमीन फोड़कर बाहर नहीं आई है, वहां का पता लगाना बेहद मुश्किल है।
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एमसीटी पर ही अधिक आए हैं बड़े भूकंप

50 साल के अध्ययन से सामने आया है कि सबसे बड़े भूकंप मेन सेंट्रल थ्रस्ट यानी एमसीटी पर आए हैं। उत्तराखंड की बात करें तो चाहे वह 1991 का उत्तरकाशी का भूकंप हो या फिर 1999 में आया चमोली का भूकंप। यहां बड़े भूकंप आने की वजह यही रही।

सुनामी का प्लेन रेप्चर था 1200 किलोमीटर
सालों पहले जापान में सुनामी आई थी, जिसमें बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ था। वह नेपाल में आए रिक्टर पैमाने पर इस 7.9 तीव्रता के भूकंप से 10 गुना अधिक शक्तिशाली थी। उसका प्लेन रेप्चर 1200 किलोमीटर था, जो पानी के भीतर था।

रेप्चर का सीस्मिक सर्वे करेंगे वैज्ञानिक
वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों के साथ टीम बनाकर जल्द ही नेपाल रवाना होंगे। वह पहले इसी रेप्चर का सीस्मिक सर्वे करेंगे। भूकंप के असर का अध्ययन किया जाएगा। इसकी वजह से होने वाले बदलाव देखे जाएंगे।
- डॉ. सुशील कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, वाडिया हिमालयन भूविज्ञान संस्थान
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