नेपाल में आए भूकंप का प्लेन रेप्चर (जहां चट्टानें टूट रही होती हैं) 120 किलोमीटर सामने आया है। विशेषज्ञों की मानें तो इसकी चौड़ाई 50 किलोमीटर है।
रिवर्स फॉल्ट की वजह से जमीन के भीतर 3 मीटर का भ्रंश (भूमि का उठान) हुआ है। अब तक आए बड़े भूकंपों में यह सबसे कम गहराई वाला इवेंट था। इसकी गहराई 12 किलोमीटर थी, जबकि अन्य बड़े भूकंप अमूमन 25 किलोमीटर से अधिक वाले रहे हैं। गहराई कम रहने की वजह से ही काठमांडू में जान-माल का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।
भूकंपों की दृष्टि से पूरी हिमालयन बेल्ट संवेदनशील है। नेपाल में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.9 आंकी गई। इससे भी अधिक तीव्रता के भूकंप की इस बेल्ट में भविष्य में आने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। ताजे भूकंप का केंद्र काठमांडू से लगभग 80 किलोमीटर दूर लामगंज में था।
हिमालयन बेल्ट में जमीन के भीतर जबरदस्त ऊर्जा सिंचित हो रही है, लेकिन कहां अभी तक इसका पता नहीं लगाया जा सका है। जिन स्थानों पर भूकंप आए हैं, वहां तो प्री-कर्सर लगाए जा सकते हैं, लेकिन जहां अभी हलचल जमीन फोड़कर बाहर नहीं आई है, वहां का पता लगाना बेहद मुश्किल है।