ज्योतिषाचार्य प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि हमारे सभी व्रत, आस्था मेले, मुहूर्त ग्रहों पर आधारित होते हैं। सूर्य चंद्र के द्वारा हिंदी माह का निर्माण होता है। 30 तिथियों का माह होता है, जिसमें 15 दिनों बाद अमावस्या और 15 दिनों बाद बाद पूर्णिमा होती है। इन माह में पूरे वर्ष ये तिथियां घटती बढ़ती रहती हैं।
तीन वर्षों के उपरांत ये घटी-बढ़ी तिथियां एक पूरे माह का निर्माण करती हैं। विशेष ये होता है की इस माह में संक्रांति नहीं होती। इस कारण लोग इसे मलमास भी कहते हैं। मलमास में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।
मांगलिक कार्यों के लिए करना होगा इंतजार
क्योंकि पितृ पक्ष में कोई मुहूर्त नहीं होता है। अधिकमास में भी कोई मुहूर्त नहीं होगा। जो लोग नवरात्रि में नई दुकान, घर, वाहन या कोई भी नया कार्य प्रारंभ करने की सोच रहे हैं। उन्हें अभी और इंतजार करना होगा।
तीन बार बना था ऐसा संयोग
सबसे पहले वर्ष 1942 में ऐसा संयोग बना था। इसके बाद वर्ष 1982 और फिर वर्ष 2001 में भी दो अश्विन मास आए थे। इस अश्विन मास के दो महीने होंगे। अश्विन माह 3 सितंबर से 31 अक्तूबर तक रहेगा। यानी इसकी अवधि दो माह रहेगी। इन दो माह में बीच की अवधि वाला एक माह का समय अधिकमास रहेगा। पितृमोक्ष अमावस्या के बाद 18 सितंबर से 16 अक्तूबर तक पुरुषोत्तम मास रहेगा। इस कारण 17 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि पर्व शुरू होगा।