मंगलवार 17 सितंबर से श्राद्ध, तृतीया के श्राद्ध से प्रारंभ हो रहे हैं। इसके बाद प्रतिदिन एक श्राद्ध है। श्राद्धों का यह क्रम तिथियों के फेर के चलते एक बार फिर 25 सितंबर बुधवार को गड़बड़ा जाएगा। बुधवार को वैसे तो एकादशी हैं, लेकिन एकादशी और द्वादशी के श्राद्ध इसी दिन पड़ रहे हैं।
27 सितंबर शुक्रवार को त्रयोदशी के दिन चतुर्दशी का श्राद्ध हो जागए। जबकि चतुर्दशी तिथि का पूर्ण क्षय हो गया है। अमावस्या का श्राद्ध और पितृ विसर्जन 28 सितंबर को पड़ेंगे। गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन दो दिन बार 12 सितंबर को होगा। श्राद्ध पक्ष प्रारंभ हो जाने के कारण शुक्रवार को विसर्जन की शुद्ध तिथि नहीं मानी गई है। गणपति प्रतिमाओं के विसर्जन का क्रम लगातार जारी है।