उत्तराखंड एसटीएफ को सेराघाट क्षेत्र में वन्यजीवों का शिकार कर उनकी खालों और अंगों की तस्करी करने के मामले में बड़ी सफलता मिली है। टीम ने एक व्यक्ति को तेंदुओं की छह खालों और अंगों के साथ गिरफ्तार किया है, जबकि उसका साथी मौके से फरार हो गया। बरामद की गईं खालें करीब एक से दो वर्ष पुरानी हैं।
उत्तराखंड एसटीएफ को एक मार्च को पिथौरागढ़ के सेराघाट क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय तस्करों के वन्यजीवों के अंगों की तस्करी की सूचना मिली। इसके बाद प्रभारी निरीक्षक एसटीएफ कुमाऊं एमपी सिंह के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। एसटीएफ ने सेराघाट क्षेत्र में एक आल्टो कार को रोककर चेकिंग की तो इसमें सवार बेड़ीनाग निवासी राहुल सिंह से तेंदुओं की छह खालें, 43 नाखून और 24 दांत बरामद हुए। इस दौरान सेरा बडोली निवासी उसका साथी सोनू डोभाल फरार हो गया। आरोपी के विरुद्ध बेड़ीनाग थाने में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 2, 9, 39, 42, 48, 50, 51 और 57 वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एसटीएफ की टीम में ये थे शामिल
उप निरीक्षक केजी मठपाल, बृजभूषण गुरुरानी, कांस्टेबल महेंद्र गिरि, किशोर कुमार, सुरेंद्र सिंह कनवाल, दुर्गा सिंह पापड़ा और गुरवंत सिंह शामिल रहे।
करंट लगाकर मारते थे तेंदओं को
गिरफ्तार आरोपी राहुल ने पूछताछ में बताया कि वे लोग तेंदुओं को जंगलों में करंट लगाकर मारते थे। इसके बाद खालों और अंगों को नेपाल के वन्यजीव अंग तस्करों को बेच देते हैं। इससे पूर्व भी 2019 में गिरफ्तार अभियुक्त और उसका फरार साथी नेपाल में एक खाल बेच चुके हैं। एसटीएफ तेंदओं की खालों की तस्करी मामले में पूरा नेटवर्क खंगालने के लिए सख्ती से पूछताछ कर रही है।
जिले में चार साल में पांच से अधिक वन्यजीव तस्करी के मामले पकड़े गए
जिले में वन्यजीव अंग तस्करी के पांच से अधिक मामले सामने आए हैं। इनमें से पिथौरागढ़ क्षेत्र में वर्ष 2017 में दो, 2018 में दो, 2019 में एक और गंगोलीहाट क्षेत्र में 2020 में एक मामला सामने आया है।