आपदा में हताहत हुए यात्रियों का नाम-पता तो दूर, राज्य सरकार के पास अभी भी उनका सही आंकड़ा नहीं है। मगर इसके बावजूद त्रासदी से सरकार ने कोई सबक नहीं लिया है।
बरती गई लापरवाही
यात्रा के प्रथम चरण में यात्रियों के पंजीकरण के लिए बरती गई लापरवाही दूसरे चरण में भी जारी है। बीते दिनों धामों की यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं का पंजीकरण नहीं किया गया। जिससे किसी भी प्रकार के जोखिम में संबंधित लोगों का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
लंबे अरसे से चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं का तीर्थनगरी में नगर पालिका प्रशासन की ओर से पंजीकरण किया जाता है। बीते कुछ वर्षों से इस प्रक्रिया को लेकर मनमानी चल रही है। जिससे यात्रियों का सही रिकार्ड मेंटेन नहीं हो पा रहा है। इसका कारण ऋषिकेश के साथ ही हरिद्वार में भी बिना ठोस व्यवस्था के पंजीकरण शुरू कराने को माना जा रहा है।
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यही कारण है कि यात्रा के प्रथम चरण मई-जून में भी स्थानीय स्तर पर चुनिंदा वाहनों (यात्रियों) का ही रजिस्ट्रेशन किया गया। बीती माहभर की यात्रा में धामों में पहुंचने वाले कुल यात्रियों की संख्या 10 से 12 लाख के सापेक्ष महज डेढ़ लाख लोगों का ही पंजीयन हो सका था। इनमें भी अधिकांश वाहन ज्वाइंट रोटेशन के तहत संचालित होने वाले थे।
अब जबकि दोबारा यात्रा आरंभ हो चुकी है, मगर पालिका प्रशासन की ओर से यात्रियों का पंजीकरण नहीं किया जा रहा है। लोग बिना रजिस्ट्रेशन के ही जोखिमभरी यात्रा करने को विवश हैं।
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