फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मासूम से दुष्कर्म करने के बाद काफी देर तक बच्ची के परिवार वालों के साथ बैठा रहा आरोपी

Sat, 20 Jul 2019 07:48 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
विज्ञापन
Rape Victim - फोटो : Amar Ujala Graphics
विज्ञापन

मासूम से दुष्कर्म के आरोपी विकलांग की धरपकड़ को जीआरपी हरिद्वार की टीमें रवाना हो गई हैं। पांच टीमों ने हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और वेस्ट यूपी का रुख किया है। मामला पुणे (महाराष्ट्र) के रहने वाले एक खानाबदोश परिवार की बच्ची से जुड़ा है। हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर खड़ी एक ट्रेन के कोच में ले जाकर उससे दुष्कर्म किया गया था। सीसीटीवी के जरिये एक विकलांग के मासूम को उठाकर ले जाने की पुष्टि हुई थी।

विज्ञापन


जीआरपी आरपीएफ की खुली पोल
रेलवे स्टेशन पर हुई इस घटना से जीआरपी, आरपीएफ सब पर सवाल खड़ा होता है। सीसीटीवी फुटेज से सामने आया कि जब परिजन मासूम को अस्पताल ले गए, तब भी जीआरपी, आरपीएफ को खबर नहीं थी। हैरानी की बात यह है कि आरोपी उसके बाद भी कई घंटे मासूम के परिवार के साथ आए अन्य सदस्यों के पास ही बैठा रहा।

मासूम की हालत स्थिर

उधर,  एम्स (ऋषिकेश) में भर्ती मासूम की हालत स्थिर बनी हुई है।  घटना नौ-दस जुलाई की अलसुबह पांच बजे घटी थी। पुणे के थाना मार्केटवाड क्षेत्र से खानाबदोश करीब पंद्रह दिन पूर्व हरिद्वार पहुंचे थे। रेलवे स्टेशन के पास झुग्गी बनाकर रह रहे थे।

नौ जुलाई की रात को बारिश होने पर सभी रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म पर आकर सो गए थे। सुबह करीब पांच बजे एक विकलांग परिवार के बीच सो रही पांच साल की मासूम को गोद में उठाकर प्लेटफार्म पर खड़ी एक ट्रेन के कोच में ले गया था, बाद में उसे खून से लथपथ प्लेटफार्म पर छोड़कर चला गया।

एम्स ने दी जीआरपी को सूचना

मासूम के रोने की आवाज सुनकर परिजन जाग गए थे। आनन फानन में मासूम को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे। जहां से उसे एम्स, ऋषिकेश के लिए रेफर कर दिया गया। 17 जुलाई को एम्स से इस संबंध में जीआरपी को सूचना दी गई।

एसओ, जीआरपी अनुज सिंह की अगुवाई में एक पुलिस टीम ने एम्स पहुंचकर पीड़ित परिवार से घटनाक्रम की जानकारी ली थी।

सीसीटीवी फुटेज खंगाली

पुलिस ने फिर रेलवे स्टेशन पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज खंगाली तो उसमें विकलांग युवक मासूम को ले जाता दिखा। घटना को अंजाम देने के बाद वह मेला प्लेटफार्म से होते हुए फरार होने में कामयाब भी रहा था।

एसओ जीआरपी अनुज सिंह ने बताया कि आरोपी की धरपकड़ के लिए पांच टीमें गठित की गई है। टीमों ने कई राज्यों का रूख किया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उसकी धरपकड़ के प्रयास कर रहे हैं। 
विज्ञापन

एम्स प्रबंधन की सूचना पर हुआ खुलासा

एसओ जीआरपी की मानें तो खानाबदोश परिवार ने जिला अस्पताल से लेकर एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों तक को झूठ बोला। बताया कि उनकी बेटी को बंदर ने काटा है। लेकिन उनका झूठ चल न सका। चिकित्सकों को संदेह हुआ कि आखिर परिवार घटना को छिपा क्यों रहा है, इसीलिए एम्स प्रबंधन ने इस बाबत सूचना पुलिस को दी। एसओ की मानें तो पीड़ित पक्ष मुकदमे के कतई पक्ष में नहीं था। 

जीआरपी ने साधी चुप्पी
जीआरपी, हरिद्वार ने इस संबंध में मुकदमा 17 जुलाई को ही दर्ज कर लिया था। वारदात बेहद संवेदनशील थी, इसलिए जीआरपी भी घटना को लेकर चुप्पी साधे रही। शुक्रवार को मामले की सुगबुगाहट के बाद वह हरकत में आई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें