शिकायत मिलने पर बस चालक के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। दुर्घटना की सूचना मिलने पर गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. दिनेश भट्ट ने भी पहुंचकर पिता को ढांढस बंधाया।
जिस वक्त दुर्घटना घटी तब मेघा की बड़ी बहन विभा ममगाईं भी आगे स्कूटी पर चल रही थी। वह पुराने औद्योगिक एरिया में एक औद्योगिक इकाई में कार्यरत है। प्राइवेट नौकरी पेशा रहे हरीश ममगई की दो बेटियां थी और वह आजकल घर पर ही रहते हैं।
वह रोजाना मेघा को छोड़ने के लिए जाते थे। जिला अस्पताल कैंपस में मौजूद पिता ने लाडली का पोस्टमार्टम कराने तक को राजी नहीं थे। वह बस यही बोल रहे थे कि उनकी बेटी का शव उन्हें दे दिया जाए। यही नहीं वे कोई कानूनी कार्रवाई भी नहीं चाहते हैं।