जिला अस्पताल में मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के नाम पर एक फार्मासिस्ट सरेआम रुपए लेते हुए वीडियो में कैद हो गया है। फार्मासिस्ट ने 450 रुपए लिए है।
जिला अस्पताल प्रबंधन पहले तो मामले में अंजान बना रहा, लेकिन मामला सुर्खियों में आने और वीडियो दिखाने पर सीएमएस ने संबंधित आरोपी फार्मासिस्ट से स्पष्टीकरण लेने की बात कही है। वहीं, अस्पताल की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी दीपक रावत ने मामले को गंभीर माना है और शीघ्र ही कठोर कार्रवाई करने की बात कही है।
जिला अस्पताल में मेडिकल एवं फिटनेस सर्टिफिकेट बनाने के नाम पर अवैध तरीके से उगाही करने का मामला किसी से छिपा नहीं है। अस्पताल परिसर में सर्टिफिकेट बनाने के लिए दलाल भी घूमते फिरते हैं। अस्पताल के कई स्टाफ भी सीधे-सीधे रुपए लेते है। इमरजेंसी में तो पुलिस मामलों की रिपोर्ट बनाने के नाम पर पूरी वसूली होती है।
अब अस्पताल में मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के नाम पर रुपए लेते हुए एक फार्मासिस्ट की वीडियो वायरल होने से मामले को हवा मिली है। जिसमें इमरजेंसी में तैनात फार्मासिस्ट ने एक बच्चे का मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने के लिए उसके पिता से रिश्वत की मांग की। वीडियो में साफ दिख रहा है कि तय पाई होने के बाद फार्मासिस्ट ने इमरजेंसी के साथ अटैच रुम में इंजेक्शन डोर के पीछे रुपए लिए है।
फार्मासिस्ट ने रुपए लेने के बाद पहले गिने और अपनी जेब में रख लिए। लेनदेन होने के बाद फार्मासिस्ट इमरजेंसी कक्ष में अपनी कुर्सी पर जाकर बैठ गया। फार्मासिस्ट का नाम बीसी शर्मा बताया जा रहा है। रिश्वत लेकर सर्टिफिकेट बनाने के मामले में अस्पताल के अधिकारी पहले कुछ बोलने को तैयार नहीं हुए, लेकिन जब वायरल हुई वीडियो दिखायी तो अधिकारी सकते में आ गए है।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एक फार्मासिस्ट के द्वारा रुपये लेने का मामला सामने आया है। संबंधित फार्मासिस्ट से स्पष्टीकरण लिया जाएगा। स्पष्टीकरण मिलने के बाद ही अग्रिम कार्रवाई होगी।
- डा. आरती ढोंडियाल, सीएमएस, जिला अस्पताल
जिला अस्तपाल हो या कोई भी सरकारी कार्यालय, रिश्वत लेकर कोई भी कार्य करने वाले को बख्शा नहीं जाएगा। सीधे सस्पेंड किया जाएगा। जिला अस्पताल में रिश्वत लेने संबंधित वीडियो मामले में पूरी जांच कराकर आरोपी पर सख्त कार्रवाई होगी।
- दीपक रावत, जिलाधिकारी