फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देहरादून: पूर्व एआरटीओ के खिलाफ चार्जशीट की मिली अनुमति, चालान की राशि के 29 लाख रुपये किए गबन

Thu, 20 Oct 2022 11:13 AM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

 पीसीएस अधिकारी पर आरोप है कि परिवहन विभाग में नियुक्ति मिलते ही उन्होंने पद का दुरुपयोग शुरू कर दिया। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई सतर्कता समिति की बैठक में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल करने की अनुमति मिल गई है। हालांकि, अभी लिखित अनुमति विजिलेंस के पास नहीं पहुंची है। बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह तक विजिलेंस चार्जशीट दाखिल कर सकती है। 
विज्ञापन
मीटिंग ( प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गबन के मामले में जेल में बंद पूर्व एआरटीओ आनंद जायसवाल के खिलाफ विजिलेंस ने चार्जशीट तैयार कर ली है। विजिलेंस ने इसे दाखिल करने के लिए शासन से अनुमति मांगी थी। शासन की सतर्कता समिति ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दे दी है।

विज्ञापन

एआरटीओ पर करीब 29 लाख रुपये के गबन का आरोप है। विजिलेंस ने मामले की प्राथमिक जांच के बाद 18 मार्च 2017 को धोखाधड़ी, गबन, भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज किया था। करीब छह घंटे पूछताछ के बाद छह सितंबर को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। विजिलेंस ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम, धोखाधड़ी और गबन के आरोप में चार्जशीट तैयार कर ली है। 


बुधवार को मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु की अध्यक्षता में हुई सतर्कता समिति की बैठक में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल करने की अनुमति मिल गई है। हालांकि, अभी लिखित अनुमति विजिलेंस के पास नहीं पहुंची है। बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह तक विजिलेंस चार्जशीट दाखिल कर सकती है। 

विज्ञापन


ये भी पढ़ें...चंपावत:  हॉस्टल में जबरन काटे छात्रों के बाल, फिर डंडे से बुरी तरह पीटा, वार्डन की बर्बरता देख भागा छात्र
विज्ञापन


क्या था मामला  
आनंद जायसवाल वर्ष 2009 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। आरोप है कि परिवहन विभाग में नियुक्ति मिलते ही उन्होंने पद का दुरुपयोग शुरू कर दिया। वर्ष 2010 से 2015 के बीच ऋषिकेश में परिवहन कर अधिकारी के साथ एआरटीओ का अतिरिक्त प्रभार संभाला। दोहरी जिम्मेदारी का लाभ उठाते हुए उन्होंने चालान की अधिक राशि वसूली और पूरा राजस्व सरकार को नहीं दिया। एक-एक हजार रुपये के चालान कर कोष में महज 100-100 रुपये दिखाए। उन्होंने कुल 29 लाख रुपये का गबन किया था।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें