राजधानी देहरादून के हाथीबड़कला विजय कॉलोनी में गल्ले की दुकान ही वंदना गुसाईं के परिवार का भरण-पोषण का एकमात्र सहारा है। पति की सेहत खराब रहती है तो वंदना ही यह दुकान देखती है।
वंदना की माने तो जब से उसने दुकान संभाली कुछ लोग उसके पीछे सिर्फ इसलिए पड़े हैं क्योंकि वह महिलाओं के काम करने के विरोधी हैं। इन लोगों ने बिना किसी कारण दुकान पर छापा पड़वा निलंबन के आदेश कराए।
इनके नाम है दुकान
इसके चलते दुकान पर आए चावल बंट नहीं पा रहे हैं और लोग रोज यहां पहुंच वापस लौट जा रहे हैं। बुधवार को भी कई लोग राशन कार्ड लेकर अपने हिस्से का चावल मांग रहे थे। वंदना चाहते हुए भी इन लोगों को चावल नहीं दे पाई।
वंदना ने बताया कि गल्ले की दुकान जेठ हरि सिंह गुसाईं के नाम है। वह आर्मी रिटायर्ड हैं। हमारी पारिवारिक स्थिति बुरी देखते हुए उन्होंने पति मदन गुसाईं को गल्ले की दुकान संभालने की जिम्मेदारी दी।
अभद्रता करते हैं लोग
कुछ समय बाद पति काफी बीमार रहने लगे। ऐसे में अपनी दोनों बेटियों के भरण-पोषण के लिए मैं दुकान पर बैठने लगी। लेकिन क्षेत्र के कुछ लोग लगातार यह कहकर गाली-गलौच करते हैं कि महिला गल्ले की दुकान नहीं चला सकती। ये काम तो आदमियों के हैं।
वंदना ने बताया कि यही वजह है एक दिन बिना किसी कारण दुकान पर छापा मरवाया गया। लंच टाईम में भी दुकान खुली थी। यहां लोगों से पूछने पर भी कोई कमी नहीं निकली।
लिखित नहीं दे रहे आदेश
बावजूद इसके दुकान के निलंबन के आदेश दे दिए गए लेकिन कई बार पूछने पर भी कारण स्पष्ट नहीं किया गया। इसके बाद एसडीएम, डीएम, डीएसओ सभी से मुलाकात की गई तो अधिकारियों ने मुंह जुबानी राशन बांट लेने की बात कही लेकिन लिखित में आदेश नहीं दिया गया।
दुकान में कई दिनों से चावल आया हुआ है लेकिन निलंबन के चलते बंट नहीं पा रहा है। जबकि दूसरी जगह चावल के बाद अब गेहूं भी बांटा जा रहा है।
इनको नहीं है ऐतराज
एक ओर जहां कुछ लोग लगातार महिला को धमका रहे हैं। वहीं अधिकतर महिलाएं यहां साथ खड़ी हैं। वह खुले रूप से कहती हैं कि गलत दूसरे लोग हैं। यह महिला पूरी ईमानदारी से अपना काम कर रही है।
क्षेत्रवासी यशोदा गुसाईं ने कहा कि हमेशा समय पर राशन मिलता है। दुकान दिनभर खुली रहती है। हम इस महिला के काम की सराहना करते हैं। वीना कन्नोजिया का कहना है कि इतनी ईमानदारी से कोई पुरूष भी काम नहीं करता।
बुधवार को दुकान में राशन लेने पहुंचे वीना, सीमा, मीना, सुदेश, शांता, रमा, सीमा, पन्ना, रीना सभी का कहना था कि महिला को बेवजह परेशान किया जा रहा है। जबकि पूरा मोहल्ला वंदना के साथ है। यह मेहनत कर अपना परिवार पाल रही है।