साहिया में सिचांई विभाग द्वारा बनवाई गई आवासीय कालोनी जर्जर हालत में है।
दीवारों में पड़ी दरारें, जगह-जगह उखड़ा प्लास्टर और आंगन में उगी झाड़ियां और पीपल के पेड़। यह हाल सत्तर के दशक में सिंचाई विभाग द्वारा परियोजना क्षेत्र कोटी में करोड़ों की लागत से खड़ी की गई आवासीय कालोनी का है।
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राज्य गठन के बाद जहां इस कालोनी की सूरत संवरनी चाहिए थी, वहीं विभाग ने इस ओर पलट कर देखने की जहमत नहीं उठाई है। आधे से ज्यादा आवासों को लोग मरम्मत के अभाव में खाली कर चुके हैं। कुछ में डर के साए में दिन काटने को मजबूर हैं। जिन आवासों में लोग रह भी रहे हैं उन्हें भी डर के साए में रहना पड़ रहा है।
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सत्तर के दशक में वर्ष 1974 में कोटी परियोजना शुरू होने के समय कर्मचारियों के रहने के लिए सिंचाई विभाग ने आवासीय कालोनी का निर्माण किया था। जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों की रैंक के हिसाब से कई टाइप के आवास बनाए गए। मरम्मत के अभाव में कालोनी खंडहर में तब्दील होने लगी है।
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राज्य गठन के बाद से विभाग ने आवासों की मरम्मत के नाम पर एक धेला तक खर्च नहीं किया। स्थानीय निवासी कुंदन सिंह, सूरत सिंह चौहान, कुंदन सिंह नेगी आदि का कहना है कि विभाग को कालोनी की परवाह नहीं है।
मरम्मत के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। अवर अभियंता अरविंद कुमार सैनी ने कहा कि जर्जरहाल आवासों का सर्वे हो चुका है। जल्द ही इस्टीमेट तैयार कर शासन को भेज दिया जाएगा।