राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) ने राष्ट्रीय मार्गों में डग्गामार बसों को सवारी ढोने के परमिट जारी कर दिए हैं।
मंगलवार को परमिट लेकर एक बस आईएसबीटी के अंदर घुस गई तो रोडवेज कर्मचारियों में वहां हंगामा मचा दिया। सैकड़ों रोडवेज कर्मचारियों ने प्राइवेट बस को वहां से खदेड़ दिया।
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बस में बैठी सभी सवारियों को भी नीचे उतार दिया। कर्मचारियों ने परमिट वापस न लेने पर राज्यस्तर पर आंदोलन की चेतावनी दी है। प्राइवेट और सरकारी बसों के इस फेर में यात्री परेशान हो रहे हैं।
प्राइवेट बसों को खदेड़ा
मंगलवार को देहरादून-नैनीताल रूट की प्राइवेट बस आईएसबीटी के अंदर पहुंची और सवारियां भरने लगी। उत्तराखंड रोडवेज बस के कर्मचारियों ने जब प्राइवेट बस को भगाने का प्रयास किया तो उसने एसटीए द्वारा जारी परमिट दिखाया। इससे कर्मचारी भड़क गए और उन्होंने बस को वहां से खदेड़ दिया।
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इस दौरान वहां रोडवेज के डीजीएम खुशीराम, एजीएम केपी सिंह भी पहुंचे। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के जिला महामंत्री अशोक कुमार ने बताया एसटीए ने नियमों के विपरीत यह परमिट जारी किए हैं। पहले से ही रोडवेज की बसों को सवारी नहीं मिल पा रही है।
ऐसे में प्राइवेट बसों को सवारी भरने की अनुमति देना परिवहन विभाग में ताला लगाने की साजिश है। कहा कि रोडवेज कर्मचारी किसी भी हालत में प्राइवेट बसों का संचालन आईएसबीटी परिसर से नहीं होने देंगे।
ये परमिट हुए जारी
सूत्रों के अनुसार, एसटीए ने हाल ही में कुछ प्राइवेट बसों को परमिट जारी किए हैं। इनमें देहरादून-नैनीताल रूट पर पांच प्राइवेट बसों और हरिद्वार-करनाल और हरिद्वार से पानीपत के लिए भी पांच-पांच परमिट जारी किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के विपरीत है एसटीए के परमिट
सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि परिवहन निगम की बसें जहां से संचालित होंगी, वहां से एक किमी परिक्षेत्र तक प्राइवेट बस संचालित नहीं की जा सकती। ऐसे में एसटीए ने जिन प्राइवेट बसों को परमिट जारी किए हैं, वह आईएसबीटी से कैसे संचालित होंगी। यह बड़ा सवाल है।
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