पिथौरागढ़ में पातो से रालम गांव जाने के लिए लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। लिंगुरानी के पास नदी पर आवागमन के लिए बने लकड़ी के पुल की सारी लकड़ियां बह गई हैं और लोगों को लट्ठों के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है, यदि इन लट्ठों पर किसी का बैलेंस बिगड़ा तो वह सीधे नदी में गिरेगा।
चार मई 2014 को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हेलीकॉप्टर से पातो गांव का दौरा किया था। पातो गांव के लोग रालम गांव में ग्रीष्मकालीन प्रवास पर जाते हैं। मुख्यमंत्री ने लोगों की समस्या सुनने के बाद लीलम से पातो तक सड़क बनाने, पातो से रालम तक पैदल मार्ग का निर्माण करने और हर नदी पर पक्के पैदल पुल बनाने की घोषणा की थी।
पातो गांव के समाजसेवी हरीश दरियाल के नेतृत्व में बुधवार को तहसील मुख्यालय पहुंचे लोगों ने एसडीएम को सारी स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने लिंगुरानी के पास गोरी नदी के ऊपर लट्ठों के सहारे आरपार कर रहे लोगों की विवशता का जिक्र करते हुए कहा कि यह कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।
दरियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के दौरे को दो साल पूरे हो गए हैं, लेकिन गांव के लोगों की समस्या हल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि लिंगुरानी पर बना पुल जून 2013 की आपदा के समय बह गया था। उसकी जगह अस्थायी व्यवस्था में लकड़ी का पुल बनाया गया। इस पुल की लकड़ियां सड़ गई हैं। सिर्फ लट्ठे बचे हैं।
यही लट्ठे लोगों के आवागमन का साधन हैं। ज्ञापन देने वालों में मनोहर दरियाल, हरीश ढकरियाल, नरेंद्र दरियाल, प्रेम राम, राजेश कुमार, धर्मेंद्र कुमार आदि थे। एसडीएम कौस्तुभ मिश्रा ने कहा कि शीघ्र ही रालम जाने वाले रास्ते पर लकड़ी के पुल की मरम्मत की जाएगी और पक्के पुल के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
भारी बारिश से रास्ते और पुलिया टूटी
disaster in uttarakhand
- फोटो : अमरउजाला
डीडीहाट में दूनाकोट एवं देवीसूना क्षेत्र के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाले के रास्ते और पैदल पुलिया टूटने से ग्रामीणों के सामने आवाजाही के साथ ही जरूरी सामान पहुंचाने का संकट पैदा हो गया है। डीडीहाट-दूनाकोट मार्ग पर जगह-जगह मलबा आने से अब भी वाहनों के संचालन में परेशानी हो रही है।
30 जून एवं एक जुलाई को हुई भारी बारिश और बादल फटने से दूनाकेट क्षेत्र में भी भारी तबाही हुई। दूनाकोट के तीन मकान पूरी तरह से ढह गए। देवीसूना से लगे आधा दर्जन गांवों के सभी पैदल रास्ते एवं पुलिया टूटने से अब भी ग्रामीण और उनके मवेशी गांव में कैद हो गए हैं।
इन गांव के युवा जान हथेली में रखकर टूटे रास्तों एवं नदी को पार करके किसी तरह से घर के लिए राशन और जरूरी सामान आदि की व्यवस्था कर रहे हैं। क्षेत्र के बीडीसी मेंबर महेश कन्याल ने बताया कि आपदा के 13 दिन बाद भी इन गांवों की किसी ने सुध नहीं ली है। ग्रामीण अपने जानवरों के लिए घास की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं।
वहीं अंतोड़ा, कफलुवा, मौगड़ा, इजर सहित कई गांवों का संपर्क भाड़ीगाड़ नदी पर बने पुल के टूटने से बंद हो गया है। इन गांवों में राशन का भी संकट पैदा होने लगा है। लोगों के पैदल चलने के रास्ते पूरी तरह से टूट गए हैं। तहसीलदार पीसी पंत ने बताया कि दूनाकोट के तीन लोगों को मकान टूटने पर मुआवजा दे दिया गया है, जिन गांवों में पैदल रास्ते टूट गए हैं वहां रास्ते खुलवाने का काम शीघ्र कराया जाएगा।
थल के बटरौली गांव में कई मकानों को खतरा
थल तहसील के बड़ते सानीगांव ग्राम पंचायत के बटरौली गांव में कई मकान खतरे की जद में आ गए हैं। क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश से जगह-जगह भूकटाव हो रहा है। बटरौली में दीवान राम का मकान टूट गया है। उसने दूसरी जगह शरण ले रखी है। इसी गांव में गंगा देवी की गौशाला टूट गई है। सनेत गांव के राजेंद्र प्रसाद, प्रकाश कुमार के मकानों के पीछे की जमीन दरक रही है। प्रधान राजकमल ने गांव में हो रहे खतरे की जानकारी तहसीलदार को दी और तत्काल राहत राशि उपलब्ध कराने की मांग की है।