फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमलावा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए एक साथ उतरे कई लोग

विज्ञापन
विज्ञापन
साहिया। मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल, मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया...
विज्ञापन

शायर मजरूह सुल्तानपुरी की ये पंक्तियां लखवाड़ गांव के रहने वाले नौ वर्षीय गौरांग और उनके माता-पिता हिमांशु चौहान, शीला चौहान पर एकदम सटीक बैठती हैं। 30 दिसंबर 2020 को तीनों ने साहिया बाजार के पास बहने वाली अमलावा नदी में उतरकर उसे स्वच्छ बनाने का बीड़ा उठाया था। तीनों लोग दिनभर नदी किनारे लगे कूड़े के ढेर को उठाने के काम में लगे हुए थे। उनकी इस मुहिम ने स्थानीय लोगों के साथ ही प्रशासन को आइना दिखाने का काम किया था। इसकी देखा-देखी कर रविवार को बड़ी संख्या में लोग उनके साथ नदी में स्वच्छता अभियान चलाने के लिए उतरे।
हिमांशु चौहान ने बताया कि कुछ माह पूर्व दसोऊ में शादी समारोह में जाते समय उन्होंने नदी की बदहाल सूरत को देखा था। इसके बाद उनके परिवार वालों ने नदी को स्वच्छ करने का बीड़ा उठाया था। 30 दिसंबर को जब वे पहली बार नदी में कूड़ा उठाने के लिए उतरे थे तो उनकी सोच थी कि कोई उनका साथ दे या नहीं, वे तीनों लोग नदी को साफ करके रहेंगे, लेकिन अब उनके साथ पूरा गांव खड़ा है। चौहान ने कहा जब तक नदी तट पूरी तरह साफ नहीं हो जाता, वे लोग साहिया आते रहेंगे। उन्होंने कहा कि कूड़ा निपटान की नियमित व्यवस्था करने को लेकर जल्द ही वे ग्रामीणों के साथ मिलकर तहसील प्रशासन से वार्ता करेंगे। सफाई करने वालों में साहिया की ग्राम प्रधान नीलम संवाई, अंकिता चमोला, आशु, संदीप, संजय शर्मा, प्रीतम चौहान, रिंकू, इंद्रपाल चौहान, सीना सिंह और प्रवीण सिंह शामिल रहे।
विज्ञापन

वेब वारियर्स भी पहुंचे साहिया
हिमांशु और उनके परिवार की इस मुहिम में उनका साथ देने के लिए रविवार को वेब वारियर्स संगठन के लोग भी साहिया पहुंचे। यहां उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर नदी तट पर बिखरे पड़े कूड़े को एकत्रित कर उसका निपटान किया।
विज्ञापन

नदी में डाला जा रहा 200 दुकानों का कचरा
साहिया बाजार से रोजाना निकलने वाले कूड़े के निपटान की कोई भी नियमित व्यवस्था नहीं है। बाजार क्षेत्र की 200 दुकानों से निकलने वाले कूड़े को सीधे नदी तट पर डंप किया जाता है। इससे नदी के किनारे कूड़े का ढेर लगा हुआ है। कूड़े से रिसने वाला गंदा पानी अमलावा नदी के पानी को दूषित बना रहा है, जबकि इस पानी का इस्तेमाल कालसी समेत आसपास के कई गांवों की आबादी पीनेे के लिए करती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें