उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लोग आज भी दहशत में राते काट रहे हैं। बाढ में पहले ही अपना बहुत कुछ गंवा चुके लोग को अब प्रशासन की नाफरमानी भी झेलनी पड़ रही है।
उत्तरकाशी में पहले जून माह में भागीरथी की बाढ़ और फिर 30 जुलाई को इंद्रावती नदी में आए उफान में जमा मलबा उत्तरकाशी नगर की तटवर्ती आबादी के लिए खतरे का सबब बना हुआ है।
नदी के कटाव से भयभीत
नदी के चलते निरंतर हो रहे कटाव से भयभीत नगरवासी प्रशासन से नदी का बहाव नियंत्रित करने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अधिकारी हैं कि सुनवाई को ही राजी नहीं।
2012 में भी आई थी बाढ़
यूं तो अगस्त 2012 की बाढ़ के बाद से ही ऊंचा हुआ नदी तल उत्तरकाशी नगर के लिए खतरा बना हुआ है, लेकिन 30 जुलाई को इंद्रावती नदी में आया मलबा भागीरथी के बीच तक पसरने से खतरा और बढ़ गया है।
आजकल भागीरथी का पानी नगर के पुरीखेत से लेकर तांबाखानी तक वाले हिस्से में जोर मार रहा है। यहां दो बहुमंजिले भवन तथा काली कमली धर्मशाला का बड़ा हिस्सा नीचे से खोखला हो चुका है तथा अन्य भवनों पर भी कटाव का खतरा बना हुआ है।
तेज बारिश अब डराती है
ऐसे में तेज बारिश होते ही नगर क्षेत्र में हलचल तेज हो जाती हैं। तटवर्ती बस्ती के लोग रातें जागकर गुजारने को मजबूर हैं। क्षेत्र के बाशिंदो का कहना है कि खतरा स्पष्ट दिखने के बावजूद प्रशासन नदी के बहाव को नियंत्रित करने का प्रयास तक नहीं कर रहा है।
लोगों का यह भी आरोप है कि प्रशासन की बेरुखी के चलते ही अधिकत्तर लोग अब पलायन करने लगे हैं। लोगों ने डीएम को पत्र लिखकर नगर क्षेत्र में नदी का प्रवाह तटों से हटाकर बीच में करने की गुहार लगाई है।
इनकी भी सुनिए
उत्तरकाशी नगर की तटवर्ती आबादी की सुरक्षा के लिए यथासंभव वायरक्रेट डलवाए जा रहे हैं। फिलहाल नदी में पानी ज्यादा होने से मलबा हटाकर डायवर्ट करने की स्थिति नहीं बन पा रही है।
- चंद्रशेखर सिंह, ईई सिंचाई विभाग उत्तरकाशी।