सरकारी तंत्र के काम करने के तौर तरीके भी गजब के हैं। एक पिता अपने मेजर बेटे की हत्या के बाद पेंशन के लिए सालों भटकते रहे। पेंशन मांगते-मांगते वह दुनिया से चल बसे। मां और भाई ने प्रयास किए तो 24 साल बाद पेंशन देने के आदेश हुए हैं।
अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट टोडरा निवासी गौरी दत्त भट्ट के बेटे भुवन चंद्र भट्ट ने गोरखपुर से एमबीबीएस किया था। इसके बाद वह सेना के चिकित्सा कोर में सिकंदराबाद, पुणे अस्पताल में तैनात हो गए। 17 अगस्त 1993 को वह पुणे जाने के लिए द्वाराहाट से हल्द्वानी आए।
उन्हें 18 अगस्त को ट्रेन पकड़नी थी। यहां से वे नैनीताल घूमने के लिए चले गए थे लेकिन वापस नहीं आए। इससे माता-पिता और परिजन परेशान हो गए। सेना की तरफ से भी खोजबीन शुरू हुई।
16 दिन बाद उनका शव हनुमानगढ़ी में मिला। छोटे भाई युगल किशोर भट्ट ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कराने पर पुलिस ने खोजबीन नहीं की। सेना की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी से पता चला कि उनके भाई की हत्या की गई थी। हत्या किसने और क्यों की, इसका अब तक खुलासा नहीं हो सका है।