उपाधि को कामयाबी का यह शिखर छूने के लिए लंबे इंटरव्यू से गुजरना पड़ा। साक्षात्कार पैनल ने उनसे नैनीताल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का नाम, उत्तराखंड में कुल जिलों की संख्या, लेखपाल और पटवारी में अंतर के अलावा विषय से जुड़े सवाल भी पूछे।
इसमें सीआरपीसी के तहत किसी महिला को अरेस्ट करने की प्रक्रिया, उस प्रक्रिया से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का डिसीजन भी पूछा गया। उन्हें आर्बिट्रेटरशिप से जुड़े सवालों का सामना भी करना पड़ा।
समाज को न्याय दूंगी
उपाधि ने कहा कि उन्हें सच को जीतते हुए देखना अच्छा लगता है। कोई न्याय की गुहार लगाए और उसे न्याय मिले, यही उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता और गुरु माहेश्वरी को दिया।
पीसीएस-जे की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए उपाधि काफी उत्साहित नजर आईं। उन्होंने कहा कि असफलता से न घबराएं। जितना हो सके, मेहनत करें। फोकस बनाए रखें। रिविजन लगातार करते रहें। प्रतिदिन कम से कम आठ से दस घंटे पढ़ाई करें। हर छोटी-बड़ी बात को समझने का प्रयास करें।
अमर उजाला का शुक्रिया किया
उपाधि ने अमर उजाला का भी धन्यवाद किया। उनका कहना है कि वह जब भी पापा के पास शॉप पर जाती थीं तो सबसे पहले अमर उजाला पढ़ती थीं। इसमें प्रतिदिन प्रकाशित होने वाले पांच सवालों ने उनकी तैयारी को पुख्ता किया।