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पापा की शॉप पर अखबार पढ़कर की तैयारी, इन सवालों के जवाब देकर जज बनी बिटिया

Sun, 22 Dec 2019 11:54 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • दून की बेटी उपाधि सिंघल ने पास की पीसीएस-जे परीक्षा
  • पिता आईएसबीटी पर चलाते हैं पत्र-पत्रिकाओं की शॉप
  • सच की जीत देखने के लिए चुनी न्याय की राह
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उपाधि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्कूल से लौटने के बाद पापा का हाथ बंटाने के लिए उपाधि शॉप पर जाती थी। यहां वह समाचार पत्रों का अध्ययन करती थीं। उनसे नोट्स बनाती थी, जिससे जनरल नॉलेज मजबूत हुईं। शुक्रवार को जारी हुए यूकेपीएससी के पीसीएस-जे रिजल्ट में उपाधि ने बाजी मारी तो पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा। उपाधि का कहना है कि वह सच को हमेशा जीतते देखना चाहती हैं।

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उपाधि सिंघल के पिता सूर्य प्रकाश सिंघल आईएसबीटी पर पत्र-पत्रिकाओं की बुक शॉप चलाते हैं। उनकी मां इंदु सिंघल गृहिणी हैं। उपाधि ने एमकेपी इंटर कॉलेज से 10वीं और 12वीं पास की। इसके बाद एमकेपी पीजी कॉलेज से बीए किया। इसके बाद डीएवी पीजी कॉलेज से एमए इकोनोमिक्स और एलएलबी पास किया। उनकी पढ़ने की लगन बढ़ती ही गई। लिहाजा, गढ़वाल विवि के एसआरटी कैंपस से एलएलएम किया।

इसके बाद इसी साल जून में उन्होंने लॉ में यूजीसी नेट परीक्षा पास की। उनका सपना जज बनने का था। लिहाजा, इसकी तैयारी में जुट गईं। उपाधि ने पहले ही प्रयास में पीसीएस-जे परीक्षा पास कर ली। उनकी इस कामयाबी पर पूरे परिवार में खुशी की लहर है। उनकी एक छोटी बहन श्रद्धा सिंघल और छोटा भाई निपुण सिंघल भी इस कामयाबी से बेहद खुश हैं।

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यह पूछे गए सवाल

उपाधि को कामयाबी का यह शिखर छूने के लिए लंबे इंटरव्यू से गुजरना पड़ा। साक्षात्कार पैनल ने उनसे नैनीताल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का नाम, उत्तराखंड में कुल जिलों की संख्या, लेखपाल और पटवारी में अंतर के अलावा विषय से जुड़े सवाल भी पूछे।

इसमें सीआरपीसी के तहत किसी महिला को अरेस्ट करने की प्रक्रिया, उस प्रक्रिया से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का डिसीजन भी पूछा गया। उन्हें आर्बिट्रेटरशिप से जुड़े सवालों का सामना भी करना पड़ा।

समाज को न्याय दूंगी
उपाधि ने कहा कि उन्हें सच को जीतते हुए देखना अच्छा लगता है। कोई न्याय की गुहार लगाए और उसे न्याय मिले, यही उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता और गुरु माहेश्वरी को दिया।
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असफलता से न घबराएं

पीसीएस-जे की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए उपाधि काफी उत्साहित नजर आईं। उन्होंने कहा कि असफलता से न घबराएं। जितना हो सके, मेहनत करें। फोकस बनाए रखें। रिविजन लगातार करते रहें। प्रतिदिन कम से कम आठ से दस घंटे पढ़ाई करें। हर छोटी-बड़ी बात को समझने का प्रयास करें।

अमर उजाला का शुक्रिया किया
उपाधि ने अमर उजाला का भी धन्यवाद किया। उनका कहना है कि वह जब भी पापा के पास शॉप पर जाती थीं तो सबसे पहले अमर उजाला पढ़ती थीं। इसमें प्रतिदिन प्रकाशित होने वाले पांच सवालों ने उनकी तैयारी को पुख्ता किया।
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