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हरीश रावत ने तोड़ा है जनता का विश्वास : पीसी तिवारी

Sun, 18 Dec 2016 12:55 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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PC tiwari - फोटो : amar ujala
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क्षेत्रीय सरोकारों की सियासत कर रहे पीसी तिवारी के आंदोलन व रचनात्मक संघर्ष का लंबा इतिहास है। 59 वर्षीय तिवारी के नेतृत्व में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने जल, जंगल और जमीन के मुद्दों पर कई सरकारों को कटघरे में खड़ा किया। बमुश्किल 17 साल के होंगे तो लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन में कूद पड़े। कुमाऊं विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष बने।
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गरीबों को भीख नहीं भूमि दो, नशा नहीं रोजगार दो का नारा दिया, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनेकों बार जेल गए। बाल अधिकार आंदोलन के नेता नोबल पुरस्कार विजेता  कैलाश सत्यार्थी के साथ भी काम किया। इस समय वे मुख्यमंत्री हरीश रावत के सबसे कट्टर आलोचक हैं। क्षेत्रीय दलों की सियासत को लेकर अमर उजाला संवाददाता गौरव मिश्रा ने पीसी तिवारी से बातचीत की, जवाब में वे क्या बोले, आप भी पढ़िए-

आप मुख्यमंत्री हरीश रावत से इतना गुस्साए क्यों हैं कि उन्हें प्रदेश का सबसे बड़ा विलेन करार दे दिया?
- उत्तराखंड के लोगों ने हरीश रावत को हमेशा बेइंतहा प्यार व आदर दिया। उन पर आंख बंद कर विश्वास किया, लेकिन हरीश रावत ने लोगों का विश्वास तोड़ा है। राजनीतिक भ्रष्टाचार, माफिया राज, अपराधियों को संरक्षण देने, संसाधनों को कारपोरेट के हवाले करने व शांतिपूर्ण आंदोलन के साथ भयानक क्रूरता बरतने की नवीन परंपरा डालने वाले हरीश रावत ही हैं। इन्होंने राजनीति को विकृत कर पहाड़ में नई परंपरा डाली। 
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नानीसार में ऐसा क्या हुआ ?
- मैंने कहा न कि मुख्यमंत्री बनने पर प्रदेशवासियों को इनसे बहुत उम्मीद थी, लेकिन सत्ता में आते ही इन्होंने अपना असली चेहरा दिखाना शुरू कर दिया। नानीसार में इन्होंने  जमीन बांट दी। हमारे साथ क्षेत्रवासियों ने विरोध किया तो मारपीट व भयानक उत्पीड़न किया। एससी अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज किए। 381 लोगों पर मुकदमे लादे गए। मेरे बेटे तक के खिलाफ केस दर्ज किया गया, जिसका कि राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। अल्मोड़ा सत्र न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणी ही सरकार की पोल खोलने के लिए काफी है।

आपके निशाने पर कांग्रेस ही क्यों ?
- मुख्यमंत्री उत्तराखंड ने हाल ही में कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी को 20 बीघा भूमि एक रुपये नजराने पर आवंटित कर दी। इस तरह के सैकड़ों छोटे-बड़े मामले हैं। इस समय प्रदेश में माफिया राज चल रहा है। भ्रष्टाचार चरम पर है, शासन-प्रशासन नाम की कोई चीज़ नहीं है। जैसे जैसे चुनाव नजदीक आएगा, हम सरकार के खिलाफ तमाम घोटाले खोलेंगे। मौजूदा सरकार के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच को चुनावी मुद्दा बनाएंगे।

इतना सब होने के बाद भी क्षेत्रीय दल निष्क्रिय क्यों हैं?
- भाजपा और कांग्रेस ने प्रदेश को धोखा दिया है। इसके खिलाफ क्षेत्रीय दलों को मिलकर आगे आना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। क्षेत्रीय दल प्लानिंग पार्ट में कमजोर रहे। अगर चरणबद्ध तरीके से दल आगे बढ़ते तो अन्य प्रदेशों की तरह राष्ट्रीय दलों को यहां से अपना बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ता। अब इस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी?
- इस बारे में अभी मंथन चल रहा है। हमारे पास संसाधन नहीं है, लेकिन हम जोर-शोर से लगे हैं। यह तय है कि उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी कम से कम 20 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। अन्य सीटों पर हम अच्छे उम्मीदवारों को समर्थन देंगे। भाजपा-कांग्रेस बाईपोलर चुनाव चाह रहे हैं। वे नहीं चाहते कि यहां पर राज्य समर्थक आंदोलनकारी ताकतें ताकतवर हों। इसलिए यह बड़ी चुनौती है। इन दोनों दलों के पास अकूत दौलत है। हम फकीरों की तरह चुनाव लड़ेंगे। 
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