नारी निकेतन में अब मानसिक रूप से बीमार संवासिनियों को सीधे एंट्री नहीं मिलेगी। नारी निकेतन प्रबंधन की ओर से मेंटल हेल्थ एक्ट का सख्ती से पालन किया जाएगा। 50 की क्षमता वाले नारी निकेतन में 105 मानसिक संवासिनियां रह रही हैं।
नारी निकेतन में अब तक मानसिक संवासिनियां सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश से सीधे नारी निकेतन भेजी जाती हैं। जबकि मेंटल हेल्थ एक्ट के अनुसार उन्हें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आदेश से भेजा जाना चाहिए।
नियम के हिसाब से सीजेएम के आदेशानुसार पहले उन्हें मानसिक अस्पताल भेजा जाना चाहिए। जहां इलाज के बाद ही उन्हें नारी निकेतन भेजा जाना चाहिए। हालांकि अब तक ऐसा नहीं हो रहा है। लिहाजा, नारी निकेतन प्रबंधन ने एक्ट को सख्ती से लागू करने का फैसला लिया है। अब सीजेएम के आदेश के बिना मानसिक संवासिनी को निकेतन में नहीं लिया जाएगा।
लटका 12 संवासिनियों का मामला
नारी निकेतन प्रबंधन की सख्ती के बाद 12 मानसिक संवासिनियों का मामला लटक गया है। दरअसल सेलाकुई स्थित मानसिक अस्पताल ने महिला आयोग के माध्यम से 12 संवासिनियों को नारी निकेतन भेजने को कहा था। महिला आयोग ने जिला प्रोबेशन को यह पत्र भेजा था, लेकिन निकेतन हरी झंडी नहीं दे रहा है।
अब तक मानसिक रूप से बीमार संवासिनियों को बिना सीजेएम के आदेशों के ही सीधे भेजा जा रहा है। वहां जगह नहीं है। 105 संवासिनियों को ही बेहद मुश्किल से जगह मिल पा रही है। ऐसे में भला कैसे इतनी संवासिनियों को जगह दी जाए। मेंटल हेल्थ एक्ट का पालन करते हुए उन्हें कुछ समय अस्पताल में भी बिताना होगा। 12 संवासिनियों के बाबत भी सीजेएम के आदेशों पर ही अमल होगा।
- मीना बिष्ट, जिला प्रोबेशन अधिकारी