कृषि मशीनरी स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेगी
कहा, ऐसी प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) की पहचान की जाएगी और उन्हें चरणबद्ध तरीके से थोक विक्रेता के रूप में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने बताया, जो पैक्स समितियां अभी प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (पीएमकेएसके) के रूप में कार्य नहीं कर रही हैं, उन्हें इसके दायरे में लाया जाएगा।
बताया, इन महत्वपूर्ण निर्णयों से प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के कार्य क्षेत्रों में विस्तार होगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के भी अवसर बढ़ेंगे। किसानों को उर्वरक, कीटनाशक, बीज और कृषि मशीनरी स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेगी।
बताते चलें कि उत्तराखंड में 647 पैक्स समितियां कार्य कर रही हैं। सभी समितियों के कंप्यूटरीकरण का कार्य भी पूरा किया जा चुका है।
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जैविक उर्वरक के विपणन से जुड़ेंगी पैक्स
पैक्स समितियों को जैविक उर्वरकों, विशेष रूप से फर्मेटेड जैविक खाद, तरल फर्मेटेड जैविक खाद, फॉस्फेट समृद्ध जैविक खाद के विपणन से जोड़ा जाएगा। उर्वरक विभाग की मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस योजना के तहत उर्वरक कंपनियां छोटे बायो-ऑर्गेनिक उत्पादकों के लिए एक एग्रीगेटर के रूप में कार्य कर अंतिम उत्पाद का विपणन करेंगी। इस आपूर्ति और विपणन शृंखला में खुदरा विक्रेताओं के रूप में पैक्स को भी शामिल किया जाएगा। बताया, उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए पैक्स को ड्रोन उद्यमियों के रूप में भी कार्यरत किया जा सकेगा। साथ ही ड्रोन का उपयोग संपत्ति सर्वेक्षण के लिए भी किया जा सकता है।