ग्रामीणों में है नाराजगी
ऐराड़ी गांव में इतनी बड़ी भूमि बेचे जाने से ग्रामीण नाराज हैं। बताया कि भूमि बेचने से पहले गांव में न तो पंचायत बैठाई गई और न ही ग्राम प्रधान या ग्रामीणों को मामले की जानकारी दी गई। परिवार के अधिकांश लोग बाहर रहते हैं जबकि दो-तीन परिवार ही वर्तमान में गांव में रह रहे हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि निर्माण कार्यों से उनके जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
भूमि की जांच के लिए जिलाधिकारी के आदेश प्राप्त हुए हैं। भूमि रेरा के नियमों के तहत खरीदी गई या नहीं इसके लिए पत्रावलियां देखी जा रही है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगा। - गौरी प्रभात, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, तहसील पौड़ी।
-- मामले की जांच के लिए एडीएम की अध्यक्षता में समिति गठित कर दी है। समिति में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर, रजिस्ट्रार व ईई डीडीए को शामिल किया गया है। - स्वाति एस भदौरिया, जिलाधिकारी पौड़ी।
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क्या कहते हैं रेरा के नियम
राजस्व प्रशासन के अनुसार रेरा के नियमों के तहत 500 वर्गमीटर से बड़ी या आठ से अधिक फ्लैट व इकाइयों वाली सभी आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं का पंजीकरण अनिवार्य है। कंपनी को खरीदारों से मिलने वाली राशि का 70 प्रतिशत एक अलग बैंक खाते में रखना होगा। खरीदार कंपनी को परियोजना से जुड़ी सभी मंजूरियां, लेआउट प्लान और निर्माण पूरा करने की तय समयसीमा सार्वजनिक करनी होगी। किसी भी संपत्ति की बिक्री या प्रचार करने से पहले रियल एस्टेट एजेंटों को भी राज्य के संबंधित प्राधिकरण में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।