मंगलवार को पर्वतीय पटवारी इसी साल दो अक्तूबर से पर्वतीय क्षेत्रों में पुलिसिंग का काम पूरी तरह से छोड़ देंगे। मंगलवार की शाम करीब पांच घंटे से अधिक की मैराथन बैठक के बाद पर्वतीय पटवारी महासंघ ने इस फैसले का ऐलान किया।
संग्रह अमीनों को नायब तहसीलदार पद पर पदोन्नति में आरक्षण दिए जाने से भी पटवारी खफा है। बुधवार को घटक संगठनों की संयुक्त बैठक के बाद हड़ताल पर जाने का फैसला भी लिया जा सकता है।
नैनीताल और अल्मोड़ा में पटवारी एक अगस्त से ही पुलिस का काम छोड़ चुके हैं।
प्रदेश के पर्वतीय जिलों में पटवारियों पर दोहरी जिम्मेदारी है। एक तरफ इन्हें राजस्व का काम बतौर पटवारी देखना होता है तो दूसरी तरफ इनके जिम्मे ग्रामीण क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था का जिम्मा भी है।
ये है नाराजगी की वजह
पटवारियों की शिकायत है कि पुलिस का काम बढ़ता जा रहा है। वहीं, सरकार पटवारियों को मिलने वाली सुविधाएं तक कम करती जा रही है।
इससे खफा पटवारियों ने मंगलवार को दून में हुई पर्वतीय पटवारी महासंघ की कार्यकारिणी में पुलिस का काम दो अक्तूबर से पूरी तरह से छोड़ देने का फैसला किया।
नायब तहसीलदार पद पर संग्रह अमीनों को पदोन्नत करने में आरक्षण के सरकार के फैसले से भी पटवारी नाराज हैं। बुधवार को लेखपाल संघ, रजिस्ट्रार कानूनगो संघ और पटवारी संघ की संयुक्त बैठक होगी।
इस बैठक में इस मामले को लेकर आंदोलन की रूपरेखा तय होगी। पदाधिकारियों का कहना है कि बैठक में हड़ताल का भी फैसला किया जा सकता है।
हड़ताल पर जाने की चेतावनी
पटवारियों का कहना है कि पहले ही मुख्यमंत्री आश्वासन दे चुके थे कि संग्रह अमीनों को पदोन्नति में कोटा नहीं दिया जाएगा। यह मसला तीन मंत्रियों की उपसमिति के पास विचाराधीन है। फिर सरकार संग्रह अमीनों को कोटा लाभ किस आधार पर दे सकती है।
अल्मोड़ा और नैनीताल से एक अगस्त से जारी पुलिस कार्य के परित्याग को महासंघ ने समर्थन दिया। पुलिस कार्य छोड़ने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई तो सभी पटवारियों के हड़ताल पर चले जाने की चेतावनी भी दी है।
नई कार्यकारिणी घोषित
अध्यक्ष- धीरेंद्र सिंह कुमाई, महासचिव- विजय पाल सिंह मेहता, संरक्षक- भगवती प्रसाद जगूड़ी, उपाध्यक्ष- रमेश चौहान, कोषाध्यक्ष- महीपाल पुंडीर, सहसचिव- शंकर कापड़ी, संगठन मंत्री- जगदीश सिंह नेगी।