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Patwari Lekhpal Paper Leak: मास्टर और डॉक्टर हैं सबसे बड़े राजदार, सीने में छुपे हैं पेपर लीक के कई राज

Sun, 15 Jan 2023 10:28 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

माना जा रहा है कि गिरोह में सिर्फ यही सात लोग ही नहीं हैं बल्कि इनकी एक बड़ी चेन है, जिसने करोड़ों रुपये के वारे न्यारे कर पेपर लीक कराया है।
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पेपर लीक - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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पटवारी-लेखपाल भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में सबसे बड़े राजदार इस गिरोह के मास्टर और डॉक्टर बताए जा रहे हैं। इनके सीने में कई बड़े राज छुपे हो सकते हैं। एसआईटी इन्हें जल्द पुलिस कस्टडी रिमांड में लेकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।

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माना जा रहा है कि गिरोह में सिर्फ यही सात लोग ही नहीं हैं बल्कि इनकी एक बड़ी चेन है, जिसने करोड़ों रुपये के वारे न्यारे कर पेपर लीक कराया है। अभ्यर्थियों की संख्या भी इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। पेपर लीक मामले में शुरुआती पड़ताल के बाद एसटीएफ ने सात लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से संजीव को डॉक्टर कहते हैं। रुड़की हाईवे स्थित उसके फ्लैट में सबका आनाजाना था।

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इसी फ्लैट में पेपर लीक के संबंध में तमाम योजनाएं भी बनी थीं। बताया जा रहा है कि फ्लैट पर एसटीएफ को पेपर लीक से संंबंधित कई चीजें भी मिली हैं। इनका भी इस कांड से ताल्लुक हो सकता है। वहीं, मनीष कोचिंग सेंटर चलाता था। उसे मास्टर कहा जाता है। उसके कोचिंग सेंटर पर अभ्यर्थी इकट्ठा हुए थे। उसी ने अभ्यर्थियों को इस बारे में बताया था।

एसआईटी अगली पूछताछ आरोपियों को पुलिस कस्टडी रिमांड में लेकर करेगी। सूत्रों के अनुसार, संजीव और मनीष ने राजपाल के माध्यम से संजीव चतुर्वेदी से संपर्क किया था। इसके बाद चेन बनती चली गई। यह चेन काफी लंबी हो सकती है। ऐसे में संजीव चतुर्वेदी, संजीव कुमार और मनीष को एसआईटी पुलिस कस्टडी रिमांड में लेने की तैयारी में है।
 

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आरोपियों के पास से एक पेन ड्राइव भी मिली
अब तक मोबाइल से पेपर लीक की बात सामने आ रही थी। लेकिन, आरोपियों के पास से एक पेन ड्राइव भी बरामद हुई है। बताया जा रहा है कि यह पेन ड्राइव संजीव चतुर्वेदी के पास से राजपाल और फिर संजीव व मनीष के पास गई। इस पेन ड्राइव को ही लक्सर और बिहारीगढ़ के अलग-अलग फार्म हाउस में कंप्यूटर पर लगाकर अभ्यर्थियों को प्रश्न और उत्तर रटाए गए।

राजपाल के पास से एक डायरी भी मिली है। इसे भी एसटीएफ ने महत्वपूर्ण साक्ष्यों में शामिल किया है। हालांकि, इसमें चंद मोबाइल नंबर और अन्य हिसाब-किताब दर्ज है। बताया जा रहा है कि यह डायरी किसी और काम की भी हो सकती है। संजीव चतुर्वेदी के पास से एसटीएफ को कोई डायरी नहीं मिली है।
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