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Iउप जिला अस्पताल में नहीं है बर्न यूनिट, गंभीर मरीजों को करना पड़ता है रेफर
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Iदीपोत्सव का त्योहार नजदीक, शाम ढलते ही सुनाई दे रहा पटाखों का शोरI
दिवाली के दौरान आग लगने की घटनाओं की आशंका रहती है। आग की चपेट में आकर घायल हुए मरीजों को तत्काल उपचार की जरूरत होती है। लेकिन उप जिला अस्पताल में बर्न यूनिट नहीं है। अस्पताल में केवल 15 फीसदी तक झुलसे मरीजों को ही उपचार मिल पाएगा। इससे अधिक जले मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाएगा।
दीपोत्सव का त्योहार नजदीक है। शाम ढलते ही पटाखों का शोर सुनाई दे रहा है। सड़कों और आसमान में कभी चमकीली तो तो कभी रंग बिरंगी आतिशबाजी नजर आ रही है। वहीं बाजारों में भी पटाखों की दुकानें सज गई हैं। दिवाली के दिन और उसके आसपास आगजनी की आशंका और उससे झुलसने के मामले एकाएक बढ़ जाते है।
लेकिन जौनसार वावर, पछवादून और हिमाचल के सीमांत क्षेत्र की जीवनरेखा कहे जाने वाले उप जिला अस्पताल में झुलसे मरीजों के उपचार का पुख्ता इंतजाम नहीं है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉॅ. विजय सिंह ने बताया कि अस्पताल में बर्न यूनिट नहीं है। ऐसे में केवल सामान्य झुलसे हुए मरीजों को प्राथमिक उपचार दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल में करीब 15 फीसदी तक जले मरीजों के उपचार की सुविधा है। उन्होंने बताया कि एक बार में करीब 10 बर्न केस का उपचार किया जा सकता है। इससे अधिक जले मरीजों को बर्न यूनिट और प्लास्टिक सर्जन की जरूरत होती है। इसलिए गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाएगा।