समुद्री मालवाहक जहाज में नौकरी के लिए अब पासपोर्ट जरूरी हो गया है। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों को चार दिन पहले इस बारे में निर्देश मिले हैं।
कार्यालय के अनुसार पहले से समुद्री जहाजों में काम कर रहे आवेदकों के पासपोर्ट प्राथमिकता के आधार पर बनाए जाएंगे। एक जून 2015 से पासपोर्ट की अनिवार्यता को पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा।
अभी तक भारतीय समुद्री सीमा से बाहर आने-जाने वाले समुद्री मालवाहक जहाज में काम करने के लिए संबंधित कंपनी का परिचय पत्र (आई कार्ड) या अनुमति पत्र ही पर्याप्त होता था। केंद्र सरकार ने अब इस छूट को समाप्त कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, समुद्री मार्गों से विभिन्न तरह के अवैध कारोबार और आतंकी तत्वों के घुसने जैसी घटनाओं की वजह से यह निर्णय लिया गया है। शिपिंग कंपनियां भी अब बिना पासपोर्ट किसी को नौकरी नहीं देंगी।
समुद्री मालवाहक जहाजों में पहले से काम कर रहे कर्मियों को भी पासपोर्ट बनवाना होगा। इनके आवेदनों को प्राथमिकता से लिया जाएगा। साथ ही क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी कार्यालय में ऐसे आवेदकों को नए नियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
युवाओं को बेहद पसंद है यह नौकरी
देहरादून के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी विजय शंकर पांडे ने बताया कि इस बारे में विदेश मंत्रालय से निर्देश मिल गए हैं। राज्य से समुद्री जहाजों में नौकरी करने वाले या इसकी तैयारी कर रहे आवेदक पासपोर्ट के लिए आवेदन कर दें।
उत्तराखंड के ऐसे आवेदक एमकेपी रोड, देहरादून स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय या टोल फ्री नंबर 18002581800 से भी जानकारी हासिल कर सकते हैं।
समुद्री मालवाहक जहाजों में कैप्टन, इंजीनियर सेक्शन में तकनीकी स्टाफ, नाविक, डेक कैडेट, अनुवादक, रसोइयां, चीफ शेफ, धोबी, मेट आदि के रूप में नौकरी मिलती है। उत्तराखंड से हजारों युवक समुद्री मालवाहक जहाजों में नौकरी करते हैं।
उत्तराखंड में इससे बिजनेस की संभावना देखते हुए देहरादून, हरिद्वार आदि शहरों में नए मैरीन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट भी खुले हैं। इनमें हर साल बड़ी संख्या में युवक प्रशिक्षण लेते हैं।
इसमें न्यूनतम वेतन पच्चीस हजार रुपए से लेकर तीन लाख तक रहता है। शार्ट टर्म कांट्रेक्ट (18 दिन से एक महीने) और लांग टर्म कांट्रेक्ट (तीन महीने से एक साल तक) के तहत इसमें काम किया जाता है। इसमें तरक्की के भी ज्यादा संभावना है। इसलिए यह क्षेत्र बेरोजगार युवकों की पसंद रहता है।