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पासपोर्ट जारी न होने पर साधु कर रहे अपने 'पूर्वजन्म' की बात

Thu, 11 Aug 2016 08:03 AM IST
मनीष चंद्र भट्ट/अमर उजाला, देहरादून
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पासपोर्ट - फोटो : Getty
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‘जात न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान...’ कबीर दास के दोहे की ये पंक्तियां आजकल पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वाले ‘बाबाओं’ पर सटीक बैठ रही हैं। ऐसे कई बाबा पासपोर्ट आवेदन में अपना असल नाम, जाति और यहां तक कि जैविक माता-पिता का नाम और जन्म स्थान भी सही नहीं बताते हैं। पासपोर्ट जारी न होने पर ये बाबा भगवा चोला धारण करने से पहले के जीवन को अपना ‘पूर्वजन्म’ बताकर पासपोर्ट कार्यालय में खूब ‘ज्ञान’ बांटते नजर आते हैं।
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बाबाओं की बात पर यकीन करें तो कोई विदेश में सत्संग तो कोई धर्म के प्रचार के उद्देश्य से पासपोर्ट बनाना चाहते हैं। उत्तराखंड के देहरादून स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में रोजाना औसतन पांच ऐसे आवेदन आ रहे हैं। हरिद्वार, ऋषिकेश, मुनिकीरेती, लक्ष्मणझूला जैसी जगहों से इस तरह के ज्यादा आवेदन आते हैं।

ज्यादातर बाबा लोग आवेदन में जैविक पिता के कॉलम में अपने गुरु का नाम दर्शाते हैं। अपनी जन्मतिथि, जन्मस्थान आदि की भी जानकारी देने में वे असमर्थता जताते हैं। पासपोर्ट कार्यालय इस उलझन में रहता है कि उनका पुलिस सत्यापन कहां से कराया जाए? जबकि जैविक पिता का नाम न दर्शाने वालों के आवेदन पासपोर्ट कार्यालय द्वारा निरस्त किए जा रहे हैं।
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क्राइम के लिहाज से भी खतरनाक

सात दिनों में बन जाएगा पासपोर्ट
बाबाओं द्वारा सही जानकारी न देना क्राइम के लिहाज से भी खतरनाक है। दरअसल, पुलिस से पूर्व में आरटीआई के तहत मिली जानकारी में यह खुलासा हो चुका है कि हरिद्वार, ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में कई अपराधी भी साधु भेष में रह रहे हैं।

ऐसे में मूल पते की जानकारी न होने पर उनके आपराधिक रिकार्ड का पता नहीं चल पाता है। कानून से बचने के लिए आपराधिक प्रवृति के ऐसे लोग पासपोर्ट बनाकर विदेश भी फरार हो सकते हैं। साथ ही नेपाल या किसी दूसरे देश के साधु भेषधारी के भी यहां अपना जन्मस्थान बताकर पासपोर्ट हासिल करने की आशंका रहती है।
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देखिए, क्या कहते हैं पासपोर्ट अधिकारी?

फॉर्म
‘इस तरह के आवेदनों की संख्या बढ़ रही है। आवेदन करने वाले कई बाबा लोग दावा करते हैं कि वे अब संन्यासी हैं और उन्हें अपनी पुरानी बातें याद नहीं हैं। वे जैविक पिता के आप्शन में गुरु का नाम दर्शा देते हैं। अद्यतन पासपोर्ट नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए ये आवेदन निरस्त कर दिए जाते हैं। हां, कोई आवेदक यदि शपथ पत्र में यह घोषणा करे कि आवेदन में दर्शाए गए नाम को ही उनका जैविक पिता माना जाए तो पासपोर्ट जारी किया जा सकता है। हालांकि उनके जन्मस्थान, आपराधिक पृष्ठभूमि के बारे में पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।’
-विजय शंकर पांडेय, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी
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