भले ही हाल में रियो में भारतीय पैरालंपिक खिलाड़ियों ने सामान्य खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन किया। पर उन्हें आज भी कोई तवज्जो नहीं मिल रही है।
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paralympic trial
- फोटो : AmarUjala
रियो में आयोजित पैरालंपिक में भारतीय पैरालंपिक खिलाड़ियों ने देश का नाम रोशन करते हुए दो स्वर्ण सहित कुल चार पदक लाकर सामान्य खिलाड़ियों से भी बेहतर प्रदर्शन किया था। इसके बावजूद उत्तराखंड का खेल विभाग पैरालंपिक खिलाड़ियों को तवज्जो नहीं दे रहा है।
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इसकी तस्दीक राजधानी में होने वाले पैरालंपिक के चयन ट्रायल में व्याप्त भारी अव्यवस्थाओं से होती है। इससे ट्रायल देने वाले खिलाड़ियों में रोष नजर आया।
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बृहस्पतिवार को परेड ग्राउंड स्थित खेल परिसर में जिला स्तरीय चयन ट्रायल में खिलाड़ियों को काफी परेशानी हुई। जहां ट्रायल होना था, वह जगह बारिश से पूरी तरह गीली हो गई थी। यही नहीं लांग जंप कोर्ट के आधे हिस्से में पानी भर गया था।
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इससे खिलाड़ियों को जंप करने में खासी परेशानी हुई। जरा सी चूक होने पर फिसलकर सीधे पानी में गिरकर हाथ पौर तुड़वाने तक का खतरा था। यह हाल था राजधानी के परेड मैदान का, जिसे 2018 में प्रस्तावित राष्ट्रीय खेलों के मद्देनजर हाल में ही काफी पैसा खर्च कर संवारा गया है।
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इस मामले में पैरालंपिक एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के सचिव प्रेम कुमार का कहना है कि ग्राउंड ठीक करने की जिम्मेदारी जिला खेल कार्यालय के पास है। चयन ट्रायल की सूचना अधिकारियों को पहले ही दे दी गई थी। इसके बावजूद ग्राउंड दुरुस्त नहीं किया गया। इसमें हमारी कोई गलती नहीं है।
पैरालंपिक खिलाड़ियों के लिए पहले से ग्राउंड तैयार किया गया था, लेकिन रात और तड़के बारिश के कारण ग्राउंड पर पानी भर गया। इसके बाद भी ट्रायल से पहले ग्राउंड को काफी हद तक ठीक कराया गया।
-एसके सार्की, सहायक निदेशक खेल