मिशन आक्रोश के तहत परेड ग्राउंड कूच सोमवार को कहीं नजर नहीं आया। पुलिस अफसरों का दावा है कि आंदोलन तो पहले ही स्थगित हो गया था, क्योंकि पुलिस कर्मियों की बेसिक पेय समान करने की मांग पहले ही पूरी हो चुकी है।
विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि पुलिस-प्रशासन की नाजायज सख्ती के चलते पुलिसकर्मियों के परिजन परेड ग्राउंड नहीं पहुंच सके। यूकेडी के चंद कार्यकर्ता जरूर सड़क पर नजर आए, जिन्हें पुलिस ने रोक लिया। परेड ग्राउंड जाने की जिद पर अड़े अधिवक्ता अरुण खन्ना को कई घंटे नजर बंद रखा गया। दूसरे अन्य नेता भी पुलिस और खुफिया तंत्र की निगरानी में रहे। सुबह से ही पुलिस ने पूरे ग्राउंड की घेराबंदी कर ली थी।
मिशन आक्रोश को लेकर सोमवार को पुलिस कर्मचारियों के परिजनों द्वारा विपक्षी दलों के साथ परेड ग्राउंड कूच करने का ऐलान किया गया था। इसी बीच शासन द्वारा पुलिस कर्मचारियों की समान बेसिक पेय की मांग को स्वीकार करने के साथ दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का चाबुक चलाया था।
पुलिस द्वारा पहले ही कर ली गई थी पूरी घेराबंदी
इसके बाद सोशल साइट्स पर संदेशों का दौर थम गया था। दो दिन से थानों और चौकियों पर पुलिस कर्मियों को हिदायत दी जा रही थी कि किसी के भी परिजन परेड ग्राउंड न पहुंच जाएं, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। पुलिस कर्मियों की छुट्टी पर भी रोक लगा दी गई थी।
सुबह से ही एसपी सिटी अजय सिंह की अगुवाई में दस थानों की पुलिस और पीएसी ने परेड ग्राउंड की नाकेबंदी कर कर ली थी, ताकि कोई अंदर प्रवेश न कर सके। एसएसपी पुष्पक ज्योति ने यहां आकर तैयारियों की समीक्षा की।
सामाजिक संगठन से जुड़े और अधिवक्ता अरुण खन्ना इस बात पर अडिग थे कि वह परेड ग्राउंड जरूर जाएंगे। उनका कहना था कि जब सबको माफ कर दिया गया तो दो पुलिस कर्मियों को बर्खास्त क्यों किया गया? पुलिस सुबह ही खन्ना को घर से लेकर कोतवाली आ गई।
यहां उनके परिचितों के आने के कारण उन्हें एसपी सिटी आफिस में नजरबंद कर दिया गया। इसी बीच यूकेडी कार्यकर्ता लताफत हुसैन, जय सिंह राता, मनमोहन लखेड़ा, खलीक अहमद आदि नारेबाजी करते हुए परेड ग्राउंड की तरफ बढ़ गए। पुलिस ने उन्हें लैंसडाउन चौक से पहले रोककर वापस कर दिया। यूकेडी नेता प्रमिला रावत की भी पुलिस और खुफिया तंत्र लगातार निगरानी करता रहा।
दावा: आंदोलन तो पहले ही स्थगित हो गया
परेड ग्राउंड कूच आंदोलन तो पहले ही स्थगित हो गया था, क्याेंकि पुलिस कर्मियों की बेसिक पेय समान करने की मांग पहले ही पूरी हो चुकी थी। ऐसे में कुछ राजनीतिक संगठनों के आने की आशंका जरूर थी। इस लिहाज से पूरी सतर्कता बरती गई, लेकिन शाम तक यहां कोई नहीं आया था।
-अजय सिंह, पुलिस अधीक्षक नगर
बोले डीजीपी
परेड ग्राउंड कूच को लेकर प्रदेश भर की पुलिस और उनके परिजनों से किसी तरह की दिलचस्पी नहीं दिखाई है। जाहिर है कि कुछ लोग जानबूझकर इस मामले को तूल दे रहे हैं। जांच चल रही है, भविष्य में कुछ और लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
-बीएस सिद्धू, पुलिस महानिदेशक