भारत और नेपाल की संयुक्त परियोजना पंचेश्वर बांध की पुनर्वास नीति का ड्राफ्ट सिंचाई विभाग ने तैयार कर लिया है। इस ड्राफ्ट पर मंगलवार को सचिव समिति की बैठक में चर्चा होगी। बैठक में आने वाले सुझाव के मुताबिक इसमें कुछ बदलाव भी किया जा सकता है। इसके बाद ड्राफ्ट को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
पंचेश्वर बांध के निर्माण के लिए उत्तराखंड के तीन जनपदों चंपावत, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा की लगभग 9100 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित होनी है। इसके लिए लगभग 31 हजार परिवारों के पुनर्वास की योजना बनाई गई है।
टिहरी बांध के निर्माण वक्त सिंचाई विभाग ने ही पुनर्वास का कार्य किया था। इस कार्य में सिंचाई विभाग के अनुभव को देखते हुए उसे पंचेश्वर बांध के निर्माण की स्थिति में होने वाले पुनर्वास का जिम्मा सौंपा गया है।
सिंचाई विभाग ने पुनर्वास नीति का प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक ड्राफ्ट में बांध से विस्थापित होने वालों के लिए जमीन के बदले जमीन की व्यवस्था नहीं की गई है। विस्थापित होने वाले लोगों जमीन के सर्किट रेट का छह गुना मुआवजा दिए जाने का प्रस्ताव किया गया है।
हालांकि इस बारे में अंतिम फैसला केंद्र सरकार को लेना है। मंगलवार को होने वाली सचिव समिति की बैठक में पंचेश्वर बांध की पुनर्वास नीति पर चर्चा होगी। सचिव समिति की मंजूरी के बाद पुनर्वास नीति के ड्राफ्ट को इस माह के अंत में होने वाली कैबिनेट की बैठक में रखा जा सकता है।