तब विधानसभा से पास हो जाता तो कानून बन जाता
हरिद्वार जिले में 2021 में त्रिस्तरीय पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल खत्म होने के बाद चुनाव न होने की वजह से छह महीने के लिए प्रशासकों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन प्रशासकों का छह महीने का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी जिले में चुनाव नहीं हुए। तब पंचायतों में प्रशासकों की पुनर्नियुक्ति की जा सके इसके लिए एक्ट में संशोधन के लिए अध्यादेश लाया गया। अध्यादेश लाने के कुछ समय बाद जिले में पंचायत चुनाव करा लिए जाने की वजह से इसे विधानसभा से पास नहीं किया गया। यदि यह विधानसभा से पास हो जाता तो कानून बन जाता।
इस वजह से लौटाया अध्यादेश
पंचायती राज एक्ट के जानकार बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की संविधानपीठ ने यह व्यवस्था दी है कि कोई अध्यादेश यदि एक बार वापस आ गया हो तो फिर से उसे उसी रूप में नहीं लाया जाएगा। ऐसा किया जाना संविधान के साथ कपट होगा। यही वजह है कि विधायी राजभवन भेजे गए अध्यादेश को एक बार लौटा चुकी है। जिसे कुछ संशोधन के बाद राजभवन भेजा गया है।
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10760 त्रिस्तरीय पंचायतें हुई खाली
प्रदेश में हरिद्वार की 318 ग्राम पंचायतों को छोड़कर 7478 ग्राम पंचायतें, 2941 क्षेत्र और 341 जिला पंचायतें हैं। जिनमें ग्राम पंचायतों में प्रशासकों का कार्यकाल चार दिन पहले खत्म हो चुका है। जबकि क्षेत्र पंचायतों में दो और जिला पंचायतों में एक जून को प्रशासकों का छह महीने का कार्यकाल खत्म हो गया है।