चुनावों के नतीजे राज्य सरकार के कामकाज का होंगे आइना
चुनावी घोषणा के साथ दोनों दल इस बात की रणनीति तो बना रहे हैं कि कैसे गांवों में प्रधानों, जिलों में पंचायत अध्यक्षों की पहचान उनके दल हो जबकि कोशिश इस बात की होनी चाहिए कि कोई गांव राज्य के मानचित्र से विलुप्त न हो उन्हें बसाया कैसे जाए। राज्य की आज आवश्यकता गांवों में राजनीतिक पकड़ मजबूत बनाने से अधिक गांवों को मजबूती देने और सुविधा सम्पन्न बनाने की है।
पंचायत चुनाव की पुरानी तस्वीर देखें तो भाजपा मजबूत रही है। राज्य के 13 जिलों में 11 जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा के पाले में हैं। जीत का ट्रैक रिकार्ड भी अच्छा है। हाल ही शहरी निकाय के चुनाव में भी बेहतर प्रदर्शन रहा है। पंचायत चुनाव के लिए भाजपा उन्हीं चेहरों की तलाश कर रही है जो जिताऊ के साथ विचारधारा का झंडा जरूर उठाकर चल रहे हों। भाजपा के लिए इन चुनावों के नतीजे राज्य सरकार के कामकाज का आइना होंगे। विकास का पहिया ग्रामीण इलाकों में दौड़ रहा है गांव के आखिरी मतदाता के जनादेश से साबित होगा।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand: शुरू से ही सवालों के घेरे में रही पंचायत चुनाव की तैयारी, आरक्षण संबंधित एक याचिका पर आज सुनवाई
कांग्रेस लंबे समय खुद को रेस में दूसरे नंबर पर बता रही है। इसका श्रेय पार्टी नेताओं को नहीं बल्कि इस राज्य के मतदाताओं को जाता है जिन्होंने लंबे प्रयास के बाद भी दो दलीय संघर्ष को बनाए रखा है। कांग्रेस के बड़े नेता भी अब हार के कारण को स्वीकार कर बैठे हैं और केंद्रीय नेतृत्व की नसीहत ने उन्हें एकता की माला जपने को मजबूर किया है। पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस नेता गंभीर दिख रहे हैं। चुनाव की घोषणा के साथ पांच बड़े नेताओं की पंचायत बताती है कि इस बार खुद से नहीं भाजपा से लड़ना चाहते हैं। कांग्रेस नेता हार का कलंक धोना चाहते हैं अगर ऐसा करने में कामयाब रहे तो सचमुच 2027 के विधानसभा चुनाव में उनके पास गांवों की खोई हुई जमीन होगी।