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पंचायत चुनावः मनचाहा खर्च करेंगे, लेकिन बताएंगे कम

Mon, 09 Jun 2014 03:15 PM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
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नामांकन के बाद पंचायत चुनाव की सरगर्मी तेज होने के साथ ही पैसों का भी खुला खेल शुरू हो गया है।
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प्रत्याशियों को मिली खुली छूट
हो भी क्यों न? इसके लिए प्रत्याशियों को खुली छूट जो मिली है। राज्य निर्वाचन आयोग ने हर प्रत्याशी के लिए खर्च सीमा तो तय कर दी, लेकिन कौन कितना खर्च कर रहा है।

इस पर नजर रखने के लिए पर्यवेक्षक या कोई कोई सिस्टम नहीं बनाया है। ऐसे में उम्मीदवार तय सीमा से कई गुना अधिक रकम खर्च करेंगे और निर्धारित सीमा में हिसाब किताब देंगे।
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सूत्र बताते हैं कि ग्राम प्रधान बनने के लिए दो से पांच लाख रुपए खर्च किए जाते हैं। जबकि इस पद के लिए चुनाव खर्च की सीमा राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से 25 हजार रुपए तय की गई है।

वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए खर्च की सीमा पौने दो लाख तय की गई लेकिन प्रत्याशी तीन करोड़ रुपए से अधिक खर्च करते हैं।

पद - तय सीमा - अनुमानित खर्च
ग्राम पंचायत सदस्य - पांच हजार - 35-40 हजार
ग्राम प्रधान - 25 हजार - 02-05 लाख
क्षेत्र पंचायत सदस्य - 25 हजार - 50 हजार से एक लाख
जिला पंचायत सदस्य - 70 हजार - 15 से 20 लाख
क्षेत्र पंचायत प्रमुख - 70 हजार - 20 से 50 लाख
जिला पंचायत अध्यक्ष - पौने दो लाख - तीन से चार करोड़

दावतों पर बहते हैं रुपए
सूत्र बताते हैं कि पंचायत चुनाव में उम्मीदवार सबसे अधिक खर्चा दावतों और समर्थक वोटरों को शराब पिलाने पर उड़ाते हैं। ग्राम प्रधान के लिए प्रत्याशी एड़ी चोटी का जोर लगाते हैं।

गांव का कोई मतदाता दिल्ली, मुंबई या कहीं और रहता है तो उसे मतदान के दिन गांव तक लाने और ले जाने का खर्च भी प्रत्याशी उठाते हैं। पोस्टर, बैनर और जनसभाओं पर भी खुलकर खर्चा किया जाता है।

ग्राम पंचायत और बीडीसी मेंबर के लिए मारामारी
ग्राम प्रधान प्रत्याशी चाहते हैं कि वे खुद प्रधान तो बनें ही, उनके करीबी लोग पंचायत सदस्य चुनकर आएं। इससे अगले पांच साल तक उन्हें अपने कार्यों पर विरोध का सामना नहीं करना पड़ता।

मिल-जुलकर सब ‘काम’ निकल जाते हैं। ऐसे में प्रधानी की चाहत रखने वाले सदस्य पद पर लड़ रहे अपने समर्थकों के लिए भी दिल खोलकर पैसा लुटाते हैं।

दूसरी ओर, क्षेत्र पंचायत प्रमुख का चुनाव बीडीसी मेंबर करते हैं। दून के हर ब्लाक में 40 सदस्य हैं। संभावित ब्लाक प्रमुख इन सदस्यों को अपने पक्ष में करने की जुगत में जुटे रहते हैं।

अंदरखाने चलती है सदस्यों की खरीद फरोख्त
प्रमुख पद पर चुनाव के दौरान अंदरखाने सदस्यों की खरीद फरोख्त चलती रहती है। सूत्रों के मुताबिक अपने पक्ष में वोट करवाने के लिए हर बीडीसी मेंबर को चार से पांच लाख रुपए तक दिए जाते हैं।

दावतों और घूमने का खर्चा अलग होता है। कुछ यही हाल जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भी रहता है। यहां जिला पंचायत सदस्य अध्यक्ष का चुनाव करते हैं। यहां भी खरीद-फरोख्त के मामले सामने आते रहे हैं।
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चुनाव खर्च का ब्योरा प्रत्याशी से लिया जाता है। उन्हें तीस दिन में शपथपत्र पर खर्च की गई राशि की जानकारी देनी होती है। लोकसभा चुनाव की तरह यहां अलग से पर्यवेक्षक की व्यवस्था नहीं है।
- एमएम खान, डीपीआरओ दून

पैसा चुनाव को प्रभावित करता है। कौन कितना पैसा खर्च कर रहा है कोई देखने वाला नहीं है। चुनाव आयोग को पूरे चुनाव को गंभीरता से लेना चाहिए।
- मूलचंद शीर्षवाल, निवर्तमान क्षेत्र पंचायत सदस्य
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