उत्तराखंड में आई आपदा के बाद घर छोड़कर कहीं अन्य जगहों पर रह रहे लोगों को पंचायत चुनाव का हिस्सा बनाने की लिए राज्य निर्वाचन आयोग पूरी ताकत लगाएगा। ताकि मतदान का प्रतिशत पिछले सालों की तुलना में बढ़ाया जा सके।
आयुक्त सुबर्द्घन का कहना है कि जिलाधिकारियों के माध्यम से कोशिश की जा रही है कि प्रभावित गांवों के जो लोग बाहर कहीं रह रहे हैं उनकी पहचान कर उन्हें संबंधित बूथ तक पहुंचाया जाए।
ईवीएम से फिलहाल मतदान संभव नहीं
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने हाईकोर्ट की मुहर लगने के बाद त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन का कार्यक्रम सोमवार को घोषित कर दिया।
आयुक्त का कहना है कि चूंकि पंचायत चुनाव में एक मतदाता को चार पदों के लिए प्रधान, ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्यों के लिए वोट करना होता है।
इसलिए ईवीएम से फिलहाल मतदान संभव नहीं है। आयोग की कोशिश है कि अगला चुनाव मशीन से कराया जाए।
जिलाधिकारियों पर चुनाव प्रबंधन का जिम्मा
प्रदेश के बाहर रह लोग बड़ी संख्या में पंचायत चुनाव में हिस्सा लेते हैं ऐसे में आयोग का कहना है कि कोई भी व्यक्ति कहीं रहकर यहां वोट कर सकता है। लेकिन उसका वोट अगर कहीं और का भी बना है तो जानकारी होने पर कार्रवाई की जा सकती है।
आयुक्त का कहना है कि चुनाव की तारीखें तय करते समय उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से भी सलाह ली गई थीं। उनका कहना है कि चुनाव प्रबंधन का जिम्मा जिलाधिकारियों पर होगा।
आयुक्त ने बताया कि इस चुनाव में 46 लाख से अधिक मतदाता हिस्सा लेंगे। अंतिम वोटर लिस्ट का प्रकाशन आठ फरवरी को किया जाएगा। इसके पूर्व 19 दिनों तक पूरक सूचियों का मुद्रण एवं ग्राम पंचायतों की निर्वाचक नामावलियों को व्यवस्थित किया जाएगा। 15 जनवरी तक कोई व्यक्ति अपना नाम जुड़वा व संशोधित करा सकता है।