लोक सभा चुनाव 2014 की परीक्षा देने के बाद अब सरकार एक और परीक्षा की तैयारी कर रही है।
सितंबर 2013 में हो जाने चाहिए थे पंचायत चुनाव
लोक सभा चुनाव परिणाम 16 मई को आएंगे। इसके बाद सरकार के पास इतना समय नहीं है कि पंचायत चुनाव की भी ढंग से तैयारी कर सके।
वैसे पंचायतों के चुनाव सितंबर 2013 में हो जाने चाहिए थे। पर जून 2013 में आई आपदा को आधार बनाते हुए उस समय पंचायत चुनाव टाल दिए गए थे।
इसके लिए सरकार को बाकायदा पंचायतों में प्रशासक बैठाने पड़े। प्रशासक छह माह तक के लिए ही बनाए जा सकते हैं। लिहाजा मार्च 2014 में पंचायतों में चुनाव होना तय था।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी पुनर्निर्माण की दुहाई
इस मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश भी दिया था। पर लोक सभा चुनाव को देखते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा था।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने आपदा के बाद क्षेत्रों में पुनर्निर्माण की दुहाई देकर किसी तरह से जान बचाई।
अब जून माह में चुनाव होने हैं। मुसीबत यह है कि 16 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे सामने आ जाएंगे। ऐसे में एक परीक्षा का परिणाम सामने आते ही सरकार को अब दूसरी परीक्षा के लिए जुटना होगा।
जाहिर है कि लोक सभा चुनाव की आचार संहिता के समाप्त होते ही पंचायत चुनाव की गहमा गहमी शुरू हो जाएगी। आपदाग्रस्त क्षेत्रों में पुनर्निर्माण को लेकर एक बार फिर सरकार को आचार संहिता से जूझना होगा।
दूसरी ओर पंचायत चुनाव प्रदेश सरकार की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है। अधिकतर पंचायतों पर भाजपा का कब्जा है और इस कारण कांग्रेस सरकार के लिए पंचायत चुनाव खासे अह्म होंगे।