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Uttarakhand: बिजली मामले में पनाश वैली एसोसिएशन की पुनर्विचार याचिका खारिज, मेंटेनेंस शुल्क भी थी वसूल रही

Sat, 22 Nov 2025 11:44 AM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

पनाश वैली रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन लोगों से बिजली शुल्क के साथ मेंटेनेंस शुल्क भी वसूल रही थी। कुछ निवासियों ने इसका विरोध कर कहा था कि बिजली के बिल को किसी और शुल्क से जोड़कर नहीं वसूला जा सकता।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
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मेंटनेंस शुल्क न देने पर बिजली काटने, जबरदस्ती बिजली बिल के साथ अन्य शुल्क वसूली के मामले में पनाश वैली रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (पीआरडब्ल्यूए) की पुनर्विचार याचिका को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने खारिज कर दिया।

पनाश वैली निवासियों ने पूर्व में नियामक आयोग के समक्ष याचिका दायर कर कहा था कि पनाश वैली रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन यहां के निवासियों से बिजली शुल्क के साथ मेंटेनेंस शुल्क भी वसूल रही थी। कुछ निवासियों ने इसका विरोध कर कहा था कि बिजली के बिल को किसी और शुल्क से जोड़कर नहीं वसूला जा सकता। मेंटेनेंस न देने पर बिजली काटना गलत और अवैध है। वे यूपीसीएल से व्यक्तिगत मीटर चाहते थे।

पांच अगस्त 2025 को पुनर्विचार याचिका दायर की

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नियामक आयोग ने मामले में सात अक्तूबर 2024 को आदेश दिया था। इसमें आयोग ने पनाश वैली रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को बिजली और मेंटनेंस अलग करने का आदेश दिया था। यूपीसीएल को निवासियों को अलग बिजली कनेक्शन देने का आदेश भी दिया था। वहीं, पूरे राज्य में इस तरह के सोसाइटी संबंधी मामलों की स्टडी करके दो माह में रिपोर्ट तलब की थी।

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पीआरडब्ल्यूए इस आदेश से असहमत थी। उसने पांच अगस्त 2025 को पुनर्विचार याचिका दायर की। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा, सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने माना कि नियमों के हिसाब से समीक्षा याचिका 60 दिन के भीतर दायर की जानी चाहिए थी।

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यह याचिका आठ माह बाद दायर हुई। सोसाइटी एसोसिएशन ने दावा किया था कि यूपीसीएल की स्टडी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन आयोग ने इसे बहाना और कानूनी रूप से अस्वीकार्य माना। यह याचिका खारिज होने से आयोग का सात अक्तूबर का आदेश यथावत रहेगा।
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