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पाकिस्तान के पहले पीएम जिन्ना ने यहां मनाया था हनीमून, इसलिए की थी इस जगह की तारीफ

Wed, 06 Mar 2019 08:34 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal सुमित जोशी, अमर उजाला, नैनीताल
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मोहम्मद अली जिन्ना - फोटो : BBC
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एक समय में लोगों से गुलजार रहने वाले नैनीताल के मेट्रोपोल होटल में छाई वीरानी के विषय में शायद ही इसकी नींव रखते समय इसके स्वामियों ने सोचा होगा।

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सोमवार को जिस समय होटल का एक भवन आग की लपटों से घिरा था, उस समय इस ऐतिहासिक धरोहर का ऐसा हश्र होता देखे लोग काफी हैरत में थे। हालांकि होटल का करीब 8.72 एकड़ में फैला होटल परिसर का विशाल भवन अभी सुरक्षित है।

जिन्ना अप्रैल 1919 में अपनी पत्नी रतनबाई के साथ नैनीताल आए थे

मेट्रोपोल होटल पड़ोसी मुलक पाकिस्तान के संस्थापक मो. अली जिन्ना के जीवन से जुड़ी यादों को भी समेटे है। बताया जाता है कि जिन्ना अप्रैल 1919 में अपनी पत्नी रतनबाई के साथ नैनीताल आए थे।

उन्होंने इसी होटल में अपना हनीमून मनाया था। जिन्ना यहां एक साथ मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च को देख काफी प्रभावित हुए थे। उन्होंने नैनीताल की काफी तारीफ करते हुए धार्मिक सौहार्द का प्रतीक बताया था। 

भारतीयों को बराबरी का हक दिलाने का गवाह मेट्रोपोल होटल

शत्रु संपत्ति मेट्रोपोल होटल अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीयों को बराबरी का हक दिलाने का गवाह रहा। जानकार बताते हैं कि ये भवन 1969 से पूर्व का है। बताया जाता है कि अंग्रेजी शासन के दौरान होटल के ऊपरी हिस्से में अंग्रेज ठहरते थे, जबकि निचले हिस्से में भारतीयों को ठहराया जाता था।

1965 में भारत सरकार के गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक विभाग के निर्देश पर प्रशासन ने इसका अधिग्रहण कर लिया। बताया जाता है कि 10 सितंबर 1965 से 30 जुलाई 1967 तक शपूरजी को 12 हजार रुपये प्रतिवर्ष के किराए पर यह संपत्ति दी गई।

कृष्ण लूथरा 15 हजार रुपये के सालाना किराए पर इसमें रहे

जुलाई 1967 से जनवरी 1997 तक कृष्ण लूथरा 15 हजार रुपये के सालाना किराए पर इसमें रहे। बताया जाता है कि 1997 से 2005 तक मैसर्स मेट्रोपोल हिल्स होटल प्राइवेट लिमिटेड ने 60 हजार रुपये प्रतिवर्ष किराए पर इसे लिया।

2005 में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर संपत्ति को दिल्ली निवासी राजा महमूदाबाद के सुपुर्द कर दिया गया। अगस्त 2010 से भारत सरकार के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक विभाग के निर्देश पर जिला प्रशासन के संरक्षण में है।

दमकम कर्मियों को आग बुझाने में लगे तीन घंटे

मल्लीताल स्थित मेट्रोपोल होटल में सोमवार शाम आग लग गई। भीषण अग्निकांड में होटल का एक भवन राख हो गया। दमकम कर्मियों को आग बुझाने में तीन घंटे लग गए। आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। छह साल पहले भी होटल के मुख्य भवन में आग लग गई थी। जिस भवन में आग लगी है वहां पूर्व में वाणिज्य कर विभाग का दफ्तर संचालित होता था। 

 सोमवार शाम करीब 6:30 बजे शत्रु संपत्ति मेट्रोपोल होटल का एक भवन आग की चपेट में आ गया। आग की लपटें देख पहुंचे लोगों ने दमकल विभाग को सूचना दी तो तीन गाड़ियां पहुंच गईं। इस बीच आग विकराल रूप धारण कर चुकी थी। फायर  हाईड्रेंट न होने की वजह से दमकल विभाग को आग बुझाने में काफी परेशानी झेलनी पड़ी। भारी बारिश और ओलावृष्टि के बावजूद आग धधकती रही। आग को देखते हुए इलाके की बिजली सप्लाई को बंद कर दिया गया।

नशेड़ियों के मुफीद बनी नैनीताल की कई निर्माणाधीन इमारतें

शत्रु संपति मेट्रोपोल होटल के खंडहर पड़े भवन में आग की लपटों ने प्रशासन की निष्क्रिय कार्य प्रणाली की पोल खोल कर रख दी है। उक्त संपत्ति के संरक्षण का जिम्मा प्रशासन के हाथों में है लेकिन देखरेख के अभाव में यह स्थान नशेड़ियों के मुफीद स्थान साबित हो रहा है। नगर में ऐसी ही कई अन्य निमार्णाधीन, खंडहरनुमा इमारतें भी हैं। स्थानीय लोग सोमवार को मेट्रोपोल होटल के खंडहर में तबदील हो चुके भवन में लगी आग के लिए नशेड़ियों को दोषी मान रहे हैं।

लोगों का कहना है कि नशेड़ियों के जमावड़े की सूचना कई बार प्रशासन को दी जा चुकी है लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई। मेट्रोपोल के समान ही नगर में लकड़ी की खंडहर में तब्दील हो चुकी कई अन्य इमारतें भी हैं, जहां नशेड़ी डेरा जमाए रहते हैं। मेट्रोपोल की इस घटना से यदि प्रशासन सबक नहीं लेता है तो नशेड़ियों की सिगरेट से निकली चिंगारी किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकती हैं। 
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ऐतिहासिक इमारतों में लगी आग की घटनाएं

-1978 में नैनीताल क्लब में भीषण आग लगी।
-1970 के दशक में पूर्व सचिवालय, वर्तमान हाईकोर्ट भवन के एक हिस्से में आग लगी।
-1970 के आसपास अयारपाटा में हटन कॉटेज हॉल भी आग से नष्ट हुआ।
-1960 के दशक में जिम कॉर्बेट का भवन कैलाश व्यू (हांडी-भांडी) जल गए थे।
-1992 में कुविवि डीएसबी परिसर के भौतिक विज्ञान विभाग में आग लगी।
-2003 में राजभवन के एक हिस्से में आग लगी थी।
- 05 अक्तूबर 2010 को कलक्ट्रेट भवन आग की भेंट चढ़ा।
- 02 अप्रैल 2013 को नैनीताल राजभवन की छत को आग ने घेरा।
-14 सितंबर 2013 को नयना देवी मंदिर परिसर से लगे गोवर्द्धन कीर्तन हॉल में आग लगी।
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