इस फॉर्मूले पर वन विभाग को एतराज
एफएसआई की ओर से 379 वृक्ष प्रति हेक्टेयर का अनुमान लगाया गया है। सिंघल ने सवाल उठाया कि यदि आवासीय परिसर में एक हेक्टेयर में 379 पेड़ (प्रति नाली लगभग आठ पेड़) खड़े थे तो आवास कहां बने थे। जबकि पाखरो और मोरघट्टी दोनों पर्यटन क्षेत्र हैं, जहां पर्यटकों के लिए वन विश्राम भवन भी हैं और गाडियों की पार्किंग की सुविधा भी है।
दूसरे प्रभाग के क्षेत्र में भी दिखा दिया अवैध पातन
वन प्रमुख की मानें तो एफएसआई से कालागढ़ टाइगर रिजर्व प्रभाग में वृक्षों के अवैध पातन की सूचना मांगी गई थी, जबकि केंद्रीय एजेंसी ने दूसरे प्रभाग में बने वाटर होल (बड़े तालाब) में पेड़ों का अवैध पातन दिखाया है। इसके अलावा 15 ऐसे क्षेत्रों में भी अवैध पातन का अनुमान दिया गया है, जिसे वन विभाग ने सर्वे में शामिल करने के लिए कहा ही नहीं था। हॉफ के अनुसार, एफएसआई की ओर से ऐसे स्थलों को चुनने का आधार स्पष्ट नहीं है।
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..तो कहां गए काटे गए छह हजार पेड़ों की डाट और ठूंठ
पीसीसीएफ सिंघल ने सवाल उठाए है कि यदि पाखरो क्षेत्र में छह हजार पेड़ काटे भी गए तो उनकी डाट (लकड़ी) और ठूंठ कहां गए। बेहद संवेदनशील क्षेत्र में अवैध रूप से इतने बड़े पैमाने पर लकड़ी को कहीं और पहुंचाना आसान नहीं है। पेड़ों के ठूंठ अब तक किसी जांच एजेंसी को नजर क्यों नहीं आए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ पेड़ तय संख्या से अधिक कटे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है, जैसा कि एफएसआई की रिपोर्ट में बताया गया है।