उन्होंने अपने समाजसेवी पिता स्व. चंद्रलाल साह ठुलघरिया के साथ नैनीताल माउंटेनियरिंग क्लब, 1985 में फ्लोरिस्ट लीग की स्थापना में योगदान दिया। साह के खींचे चित्रों पर राजभवन की कॉफी टेबल बुक सहित राज्य के प्रमुख संस्थानों के दर्जनों कैलेंडर भी बन चुके हैं। पद्मश्री शेखर पाठक के साथ उनकी पुस्तक कुमाऊं हिमालय टेंपटेशन भी प्रकाशित हुई है।
अनूप साह ने 1964 में अपने पिता द्वारा दिए गए आगफा बॉक्स कैमरे से शौकिया तौर पर फोटोग्राफी शुरू की जो बाद में उनके पर्वतारोहण, जीव-जंतुओं, वनस्पतियों की जानकारी के प्रति शौक के साथ जुड़ कर तेजी से परवान चढ़ी। साह के चित्रों में भी पर्वत शिखरों, प्राकृतिक दृश्यों, जीवों, वनस्पतियों, लोक परंपराओं की अधिकता है। साह नैनीताल के सबसे पुराने विद्यालय सीआरएसटी के प्रबंधक भी हैं। उनके पुत्र प्रांजल भी बेहतरीन फोटोग्राफर हैं। उनको आईआईपीसी ने भारत के सर्वश्रेष्ठ फोटोग्राफर का पदक दिया है।
उनका कहना है कि वह कभी पुरस्कार की दौड़ में शामिल रहे। उन्होंने इसका प्रयास भी नहीं किया। इसके बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। यह पुरस्कार उन्होंने हिमालय के संरक्षण की चिंता से जुड़े लोगों को समर्पित किया है।
हिमालय वासियों को समर्पित करता हूं पुरस्कार : अनूप
भारत सरकार की ओर से मुझे पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है। यह मेरे लिए सुखद आश्चर्य था। इतने बडे़ पुरस्कार के लिए मैं कभी प्रयासरत नहीं रहा। मैं प्रधानमंत्री का आभारी हूं, जिन्होंने मुझे इस पुरस्कार के योग्य समझा। हिमालयी समाज, जिसके बीच मैं पर्वतारोहण, ट्रैकिंग और फोटोग्राफी के माध्यम से इन चीजों को दुनिया के सामने लाया और मुझे यह पुरस्कार मिला, मैं हिमालय वासियों को यह पुरस्कार समर्पित करता हूं।