20 देशों को पहाड़ी लोककला से रूबरू करें रहे यह गायक बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। जानिए इनके बारे यह खास बातें...
प्रीतम भरतवाण दुनिया भर के 20 से अधिक देशों में अपनी जागर गायकी का जादू बिखेर चुके हैं। अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा, जर्मनी, मस्कट, ओमान, दुबई समेत कई अन्य स्थानों पर वह मंचों पर लाइव प्रस्तुति दे चुके हैं। जागर गायन के साथ ही वह ढोल सागर के भी बड़े ज्ञाता हैं। जागर गायन के साथ-साथ वे मंच पर ढोल वादन की अपनी विशिष्ट कला का भी प्रदर्शन करते हैं।
प्रीतम भरतवाण एक अच्छे जागर गायक और ढोल वादक के साथ ही अच्छे लेखक भी हैं। साथ ही उन्हें दमाऊ, हुड़का और डौंर थकुली बजाने में भी महारत हासिल है। जागरों के साथ ही उन्होंने लोकगीत, घुयांल और पारंपरिक पवाणों को भी नया जीवन देने का काम किया है।
pritam bharatwan
- फोटो : file photo
प्रीतम भरतवाण अमेरिका की सिनसिनाटी ओपन यूनिवर्सिटी, ओकलाहोमा और इलिनॉय यूनिवर्सिटी में बतौर विजिटिंग फैकल्टी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सिनसिनाटी ओपन यूनिवर्सिटी में वह पिछले लंबे समय से ढोल सागर की विजिटिंग फैकल्टी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सिनसिनाटी ओपन यूनिवर्सिटी में संगीत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर स्टीफन सियोल ने अपनी पीएचडी के दौरान प्रीतम भरतवाण से भी पारंपरिक संगीत और ढोल वादन की शिक्षा ली थी।
कई पुरस्कारों से हो चुके सम्मानित
प्रीतम भरतवाण को लोकगीत व संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यो के लिए कई सम्मान भी प्रदान किए जा चुके हैं। उन्हें उत्तराखंड विभूषण, भागीरथी पुत्र, जागर शिरोमणि, सुर सम्राट, हिमालय रत्न, जैसे कई सम्मान और उपाधियां मिली हैं। देश ही नहीं दुनियाभर उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं।
यह केवल मेरा नहीं बल्कि समस्त उत्तराखंड देवभूमि की लोक संस्कृति का सम्मान है। यह उत्तराखंड की जागर विधा लोक गायन लोक वाद्य और लोक कलाकारों का सम्मान है। औजी समुदाय पिछली कई पीढ़ियों से जागर और ढोल वादन की जिन कलाओं को जीवित रखे हुए हैए यह उसका सम्मान है।
-प्रीतम भरतवाण