75 दिनों की लंबी यात्रा में वन संरक्षण, चिपको आंदोलन, शराब विरोध, ग्राम स्वराज की स्थापना के लिए लोगों को जागरूक किया। 1976 में देवीधूरा ब्लॉक से 65 गांवों की पदयात्रा की। इस दौरान उन्होंने 40 बालवाड़ी, 30 महिला संगठन, 12 गांव के लोगों को कृषि के लिए प्रेरित किया। 1980 में उन्होंने खनन के खिलाफ आवाज उठाई। 2006 से 2010 तक प्रदेश के हिमालय और नदियों का सर्वेक्षण करते हुए हाइड्रो पावर परियोजनाओं का विरोध किया। समाजसेवा के लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
कौसानी के लक्ष्मी आश्रम से जुड़ीं राधा बहन वर्तमान में भी समाज सेवा से जुड़ी हैं। फोन पर हुई बातचीत में राधा बहन ने बताया कि दिसंबर में कौसानी से गुजरात के बड़ौदा गईं थी। एक महीने वहां रहने के बाद वर्तमान में महाराष्ट्र के वर्धा में सेवाग्राम में हैं। जल्द ही कौसानी लौटेंगी।
अमर उजाला से मिली जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी से फोन पर बातचीत में उन्होंने बताया कि पद्म श्री पुरस्कार मिलने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने पुरस्कार के लिए प्रयास भी नहीं किया था।